सवाल ये नहीं के वो कहा है । Sawaal ye nahi ke vo Kaha hai | Gazal

 

 

gazal

सवाल ये नहीं के वो कहा है,
जवाब उनके ही साथ गुम हो गया है।
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

इशारो में समझ सको तो समझ जाओ तुम,
मोहब्बत में अब एहसासों की जगह कहा है।
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

वो गुलाब आज भी हमसे पूछता है,
जिसकी खुश्बू मुझे बनाना था वो मेरा हकदार कहा है,
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

मजनू हमें पूरा शहर कहता था,
चौराहे पर हो जिसका चर्चा वो इश्क अब कहा है
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

मैखाने में अक्सर अब जाया करता हूं,
चढ़ा दे वो नशा फिर से वो शराब कहा है ।
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

मंदिर,मस्जिद और गुरुद्वारे गया,
दुआ-ए-खैर में दे दे मुझे वो,वो खुदा कहा है
सवाल ये नहीं के वो कहा है…..

 

Read More Shayari and Gazal

https://chiragkikalam.in/category/shayari/

Gazal Hindi Sad | Hindi Ghazal Video Download | Gazal Hindi Song | Hindi Gazal Mp3 Download | Gazal Hindi Song Mp3 | Ghazal In Hindi Of Love | Old Hindi Ghazals| Gazal Song |Gazal Video

Memories of Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी एक ऐसा त्योहार जो समाज के हर वर्ग के लोगो को एकजुट करता है। 1893 मे जब अंग्रेजो मे राजनीतिक सभाओ पर रोक लगा दी थी तब राष्ट्रीय नेता बाल गंगाधर तिलक ने इस त्योहार की शुरुवात की जिससे दस दिन तक त्योहार के बहाने सब लोग एक जगह आकर अंग्रेजो के खिलाफ योजना बना सके ।  वैसे इस त्योहार की शुरुवात एक सामुहिक त्योहार के रुप मे हुई थी और फिर धीरे-धीरे अब एक निजी त्योहार बन गया है। अब हर चौराहे पर तो गणेश जी की स्थापना तो होती है परंतु उस दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमो मे उतने लोग नही होते जो पहले आते थे। अब हर कोई अपने घर मे ही गणेशजी की पूजा कर लेता है। हालाकी आज भी देश के कई हिस्सो मे खासकर महाराष्ट्र मे इसे एक सामुहिक  उत्सव के रुप मे ही मनाया जाता है।

इस गणेश चतुर्थी मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गये। राजा भोज की नगरी धार मे मैंने अपना काफी बचपन  गुजारा  और इस त्योहार पर तो हम खास तैय्यारी करते थे। मुझे आज भी याद है मैं “ बडे रावले “  मे रहता था।  हमारा मोहल्ला काफी बडा था इसे छोटा गाव कहे तो गलत नही होगा।  पूरे मोह्ल्ले मे दो गणेशजी की स्थापना  होती थी। हम सब दोस्त बाजार से एक रसीद कट्टा ले आते थे और उससे पहली रसीद उसी दुकानदार की काट देते थे और रसीद कट्टे के पैसे नही देने पड्ते थे।  रविवार और बाकी दिन स्कूल से आने के बाद हम लोग चंदा लेने मोह्ह्ले मे निकल जाते थे।

11, 21, 51 तो कभी कभी 101 रुपये चंदे मे पाकर हम फूले नही समाते थे। जैसा मैंने कहा के हमारा मोहह्ला काफी बडा था और इसिलिये दो गणेशजी की स्थापना होती थी तो हमारे एरिया फिक्स थे हम मोह्ह्ले के दुसरे एरिया मे चंदा लेने नही जाते थे और ना वो लोग इधर आते थे। वैसे ये सिर्फ चंदे के लिये था। बाकी हम सब दोस्त साथ ही खेला करते थे । वैसे ये दो गणेशजी की स्थापना  पहले नही होती थी । हमारे मोहह्ले मे आने का एक ही रास्ता था और गणेशजी की स्थापना गेट के उपर एक स्थान था वहा की जाती थी । अब जो लोग गेट से दूर रहते थे उन्हे वहा होने वाले कार्यक्रम देखने बाहर तक जाना पडता था साथ ही इतने लोग थे हर बच्चा कार्यक्रम मे भाग ले ये थोडा मुश्किल था। इसिलिये हम सब दोस्त जो गेट से थोडा अंदर रहते थे उन्होने ये सोचा के क्यो ना हम अंदर भी गणेशजी की स्थापना करे । हमने कुछ बडे लोगो से बात की और उन्हे हमारा ये आईडिया पसंद आया ।

हमने फिर जगह तलाशना शुरु की और फिर थोडी मशक्त के बाद मुर्ती की स्थापना “आलू वाले आंटीजी “ के घर के बाहर करने की बात पक्की हुई। आंटीजी  वैसे मेरे स्कूल के दोस्त प्रतीक के ताईजी थे परंतु उनका आलू का बिजनेस था इसिलिये सब उन्हे आलू वाले आंटीजी कहते थे।इसके साथ ही आंटीजी ” राम”  नाम लिखने की किताब भी देती थी।  सबसे चंदा इक्क्ठा करके हम लोग गणेशजी की मूर्ती बूक कर आये और चतुर्थी के दिन सब अंकल जो हमेशा राय देते थे उनसे मुहूर्त  पुछ कर चल दिये गणेशजी को लाने।  हमने तीन साल तक अंदर गणेशजी की मुर्ती की स्थापन की फिर ना जाने क्या हुआ अचानक से स्थापना होना बंद हो गई , कारण जो रहा हो मुझे लगता है ग़णेशजी शायद इतने वक्त ही वहा आना चाहते थे।

वो तीन साल मुझे हर बार इंतजार रहता था के कब गणेश चतुर्थी  आयेगी। हम लोग एक ठेला करते थे और उस पर एक साफ कपडा बिछाकर एक पटिया रखते थे और उस पर गणेशजी को  लाते थे । गुलाल उडाते हुये ढोल के साथ नाचते हुये लाते थे हम ग़णेश जी को और एक छोटा सा पांडाल बनाते जिसमे मोहह्ले के हर सदस्य का सहयोग रहता था। हम लोग गणेशजी के आसपास एक रस्सी बांध देते थे और हमारे मोहह्ले मे एक भुआजी थे वो ये ध्यान रखते थे के गाय या कोई और जानवर पांडाल के आसपास नही आये। गणेशजी के आगमन के बाद हर दिन कोई ना कोई प्रतियोगिता शाम को होती थी । रस्सी-कूद, चेयर रेस, नींबू रेस, और अंताक्षरी जैसे कई आयोजन हम करवाते थे और इसमे पूरा मोहह्ला शामिल होता था । गणेशजी का प्रसाद  पूरे मोहह्ले मे बाटना, आरती घर –घर देना ये एक अलग की मजा था जीवन का और फिर प्रसाद भी हर दिन किसी ना किसी के यहा से आ जाता था।  कभी कभी तो हमने एक वक्त मे तीन-तीन घरो से आये प्रसाद का भोग लगाया था।

Ganesh Chaturthi

10 दिन बाद जब गणेशजी के जाने का वक्त आता था तो लगता था के जैसे घर का कोई सदस्य जा रहा हो।  फिर से ठैला लाते थे और नम आखो से गणेशजी को विदा करते थे।विसर्जन करने के लिये हम लोग देवीजी के तालाब  जाते थे। विसर्जन के दिन धार मे झाकीया निकलती और रातभर घुमते घुमते हम सब दोस्त झाकीया देखते थे। हम सब दोस्तो को रमेश पहलवान की झाकी पसंद थी और सब उसकी झाकी का इंतेजार करते थे। अगले दिन छुट्टी रहती और शाम को  मैं पापा-मम्मी और प्रिया के साथ मे  झाकिया देखने जाता था। दो दिन तक उत्सव के बाद जब नजरे उस जगह जाती थी जहा गणेश जी की स्थापना की थी तो आंखे भर आती थी । कुछ दिन तक तो शाम का वक्त ही नही कटता था। ऐसा था मेरे बचपन का गणेश उत्सव , आपने भी शायद ऐसे ही मनाया हो और अगर आप आज भी ऐसे ही मना रहे तो आप काफी लकी है।

धन्यवाद ।

नोट:- अ‍गर आपको पोस्ट पसंद आयी हो तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करे और पोस्ट पर यहा कमेंट करे। इससे मुझे और अच्छा लिखने का प्रोत्साहन मिलेगा ।

 

Ganesh Chaturthi 2017 Date | Ganesh Chaturthi 2018 Date In India | Ganesh Chaturthi Story | Ganesh Chaturthi Essay | Ganesh Chaturthi 2019 | Why Is Ganesh Chaturthi Celebrated | Ganesh Chaturthi 2018 Date In India Calendar | Ganesh Chaturthi Information In English

Arjun Tendulkar U19 Debut | अर्जुन से तेंडुलकर तक का सफर अभी बाकी है

मैं उस वक्त 12  साल का था और मुझे आज भी याद है। वो मेरी जिंदगी का पहला क्रिकेट वर्ल्ड-कप था। 1996 मे मैं पहली बार कोई क्रिकेट वर्ल्ड-कप देख रहा था। अगर मैं इसे अपने क्रिकेट की दुनिया की शुरुवात कहू तो गलत नही होगा। ये वर्ल्ड-कप भारत मे ही हो रहा था इसिलिये आजतक जो मैदानो के बारे मे सुना था उन्हे टीवी पर ही सही देखने का मज़ा अलग ही था। ये वर्ल्ड-कप इसलिये भी खास था क्योंकि इसमे सचिन तेंडुलकर भी खेल रहा था। मेरी तरह ये उसका भी पहला वर्ल्ड-कप था। इस वर्ल्ड-कप  के 15 साल बाद जब 2011 मे भारत ने वर्ल्ड-कप  जीता तो सचिन के संग मेरा भी सपना पूरा हुआ।

arjun_tendulkar

अब अगला वर्ल्ड-कप 2019 मे और उसके बाद 2023 मे और शायद ये वो वर्ल्ड-कप हो जब अर्जुन तेंडुलकर अपना पहला वर्ल्ड –कप  खेल ले। उस वक्त शायद कोई ना कोई बच्चा जरुर होगा जो उसी उत्साह से अपना पहला वर्ल्ड-कप  देखेगा। परंतु क्या उस वक्त फिर से वो दिल मे वही उम्मीद रख पायेगा जो मैंने 96 मे सचिन से रखी थी।

वैसे अर्जुन ने क्रिकेट  मे शुरुवात तो कर दी है। सचिन की तरह मुझे वो जादुई लेग और आफ स्पिन तो नही दिखी उसकी गेंदबाजी मे परंतु एक स्पार्क  जरुर  था ।  वैसे अर्जुन ने सचिन का एक सपना तो पूरा किया है और वो है तेज़ गेंदबाजी करने का ,सचिन शुरुवात मे एम.आर.एफ  अकेदमी गये थे। तेज़ गेंदबाज बनने पर उन्हे बैटिंग करने की ही सलाह मिली। अर्जुन वैसे जब सुबह उठ कर ग्राऊंड की तरफ जाते होंगे तो ना उन्हे जल्दी उठकर बस पकड्नी होती होगी ना सिर्फ एक वडापाव से काम चलाना पडता होगा। और अक्सर ऐसा होता है के जब सुविधाये तो फिर इंसपायर होने मे या ये कही आग लगने मे टाईम लगता है।

सदियो से भारत मे बाप के काम को बेटो ने अपना के आगे बढाया है और अर्जुन उसी राहपर है। अर्जुन के पास सचिन से सिखने को बहुत है पर वो कहते है के ना जब घर मे कोई पढाने वाला हो फिर भी बाहर ट्यूशन वाले मारसाब से ही सही समझ आता है। वैसे सचिन की एक बात  “प्ले इच बाल आन मेरिट” अर्जुन को  माननी चाहिये इससे उस पर दबाव हमेशा कम होता होगा।

अर्जुन का जन्म 24 सितबंर 1999 को हुआ और तब तक उन पर वो दबाव आ चुका  था  के वो सचिन तेंडुलकर के बेटे है। सचिन ने शायद नही कहा हो पर दुनिया के रायचंदो ने उसी दिन कह दिया था के आ गया एक ओर सचिन। मुझे लगता है ऐसा ही रायचंदो ने तब भी कहा होगा जब अभिषेक बच्चन का जन्म हुआ होगा और आगे  क्या  हुआ आप सब जानते है। आधे से ज्यादा टेलेंट तो ये रायचंदो ने खराब कर दिया है। वैसे हाल ही मे अर्जुन ने भारत की U-19 टीम के साथ डेब्यू किया था।  वहा उनका प्रदर्शन ठीक ही रहा था। पान की किसी दुकान पर बैठे एक रायचंद ने उसके बाद कहा –“  नी इसमे सचिन वाली बात नी है ,इसको कोई दुसरा धंधा  देख लेना चाहिये”।  वैसे इसी रायचंद ने इस टूर के पहले कहा था –“ कल से देख लेना दुसरा तेंडुलकर आ रिया है” । सबसे निराली बात ये है के ये मैचेस टीवी पर देखे नही । अर्जुन को ऐसे लोग बहुत मिलेंगे अब ये तो उस पर डिपेंड करता है के वो कैसे अपने करियर को आगे  ले जाता है।

U-19 टीम के कोच द्रविड के साथ अब अर्जुन किस राह पर जायेंगे  ये तो वक्त बतायेंगा परंतु ये सितारा रोहन गवास्कर ना  बने  इसकी हम दुआ  कर सकते है।

 

 

Arjun Tendulkar Cricinfo, Arjun Tendulkar Stats, Arjun Tendulkar Batting, Arjun Tendulkar Bowling, Arjun Tendulkar Bowling Speed, Arjun Tendulkar Cricbuzz, Arjun Tendulkar Speed, Arjun Tendulkar Ipl

Bhuvneshwar Kumar Said :Sachin को out करना हमेशा याद रहेगा: भुवनेश्वर कुमार

सचिन तेंडूलकर को आऊट करने का सपना तो हर गेंदबाज़ देखता हैं पर उन्हे जीरो पर आउट करने का आइडिया हर गेंदबाज के मन मे नही आता है. कुछ ही ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होने यह अब तक यह कारनामा किया है. उन्ही मे से एक हैं भुवनेश्वर कुमार. उत्तर प्रदेश के इस मध्यम गति के स्विंग गेंदबाज़ ने 2008 के रणजी फाईनल मे सचिन को शून्य पर आउट करा था. सचिन पहली बार घरेलू क्रिकेट मे शून्य पर आऊट हुये थे.
bhuvneshwar kumar

 

  
एक बार ब्रैड हाग ने सचिन को आउट करने के बाद सचिन से गेंद पर आटोग्राफ मांगा था. सचिन ने गेंद पर लिखा दिया था” this will never happen again (ये अब कभी नही होगा) और आज तक वो फिर से सचिन का विकेट नही ले पाये हैं. क्या आपकी बात हुई उसके बाद सचिन से कभी इस बारे मे?
हर क्रिकेटर की तरह मैंने भी काफी लंबे समय से सचिन के साथ खेलने का सपना संजो रखा था. यह चाहे फिर उनके खिलाफ ही क्यो ना खेलना हो. उस मैच में सचिन आउट हो कर पवेलियन चले गए थे. मैं बाद में उनसे मिलने पहुचा था पर मुलाकात नहीं हो पाई. उसके बाद से कोई मौका ही नही आ पाया कि सचिन से बात हो पाती. और शायद आऊट होना तो किसी भी बल्लेबाज़ को अच्छा नही लगता हैं.
जब आप सचिन को गेंद करने जा रहे थे तो सीनियर खिलाड़ियों ने क्या कहा और आपके दिमाग मे क्या चल रहा था?
मैंने सिर्फ इतना सोचा था के मैं अपनी स्ट्रेंथ पर गेंद करुंगा. सीनियर खिलाडियों ने मेरा उस वक्त काफी हौसला बढाया था. इससे मुझे काफी मदद भी मिली थी.
प्रवीण कुमार आर.पी.सिंह आपके ही स्टेट यूपी से हैं. इनसे क्या सीखने को मिलता हैं?
काफी सिखने को मिलता हैं, किस तरह से आगे बढ़ना हैं. गेंदबाजी मे क्या सुधार करना हैं. इंटरनेशनल लेवल पर किस तरह से गेंदबाजी करनी चाहिये और वहां पहुचने के लिये तैयारी कैसे की जाए, ये सारी बातें हमें सीनियर प्लेयर्स ही बताते हैं.
भारत की पिचों पर तेज गेंदबाजो को मदद कम मिलती हैं और जहां तक स्विंग की बात करे तो वो भी यहां काफी मुश्किल है. इस स्थिति मे आप अपने आप को मोटिवेट कैसे करते हो?
हां कई बार होता हैं जब पिच से कोई मदद नही मिलती हैं. उस वक्त बस विकेट टू विकेट गेंदबाजी करना होता हैं और जैसा मैंने कहा के सीनियर प्लेयर्स काफी मदद करते हैं तो ऐसे मौकों पर उनकी टिप्स हमेशा काफी काम आती हैं.
आई.पी.एल मे आपने कई इंटरनेशल प्लेयर्स को बालिंग कराई थी. उन्हे गेंदबाजी करने में और घरेलू खिलाडीयो को गेंदबाजी करने में आप क्या अन्तर महसूस करते हैं. क्या ऐसा भी कोई समय आया कि आप को लगा कि इस बल्लेबाज को बाल कराना काफी मुश्किल है.  
इंटरनेशनल प्लेयर्स के पास अनुभव काफी ज्यादा होता हैं. साथ ही उन्हे गेंदबाजी करना एक अच्छी लर्निंग होती है. लेवल का डिफरेंस भी था वहां पर और जहां तक मुश्किल की बात हैं तो ऐसा कभी नहीं लगा. आप किसी भी बल्लेबाज को आउट कर सकते हो, बस आपको अच्छी गेंदबाजी करनी होती हैं. वहां पर सिर्फ आपकी गेंदबाजी मैटर करती हैं.
ईडन गार्डेन पर आपने अपना पहला घरेलू मैच खेला था. कैसा अनुभव रहा आपका वहां खेलने का.
ईडन गार्डेन पर खेलना कई भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों का सपना रहता हैं. मेरा भी सपना था क्यूंकि ईडन गार्डेन मेरा फैवरेट मैदान भी हैं. मैंने उस मैच मे अच्छा प्रदर्शन किया था. पहली पारी मे 3 विकेट लिये थे और इसलिये मैं इसे अपना लकी ग्राउंड मानता हूं.
जिस तरह उमेश यादव और ऐरोन के पास स्पीड है. क्या एक तेज गेंदबाज के लिये स्पीड स्विंग से ज्यादा मायने रखती हैं ?
नही ऐसा नही हैं, हर गेंदबाज का गेंदबाजी करने का स्टाईल होता हैं. उमेश और ऐरोन स्पीड से गेंदबाजी करते हैं. मेरे लिये स्विंग काफी मैटर करता है. सब कुछ इस बात पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से गेंदबाजी करते हैं और आपकी स्ट्रेंथ क्या है.
 
आप एक अच्छे बल्लेबाज हैं. घरेलू मैचों में आपने छ: अर्धशतक लगाये हैं. क्या आपको लगता है कि आपकी बल्लेबाजी आपके भारतीय टीम मे चयन मे मददगार रहेगी?
मै एक आलराऊंडर के तौर पर टीम मे खेलता हूं. जब आप गेंदबाजी मे अच्छा करते हो तो वो बल्लेबाजी मे फायदा मिलता हैं और जब आप बल्लेबाजी मे अच्छा करते हो तो गेंदबाजी मे आत्मविश्वास बढता हैं. अब तक के करियर मे मेरे लिये ये काफी फायदेमंद रहा हैं
आपको कब लगा कि आपको क्रिकेटर ही बनना है?
 
बचपन से शौक था क्रिकेट खेलने का, उस वक्त क्रिकेटर बनने के बारे में कभी नहीं सोचा था. फिर जब अंडर-19 मे सेलेक्शन हुआ और वहां अच्छा खेला तो लगा कि मैं क्रिकेटर बन सकता हूं.
गेंदबाजी और बल्लेबाजी मे आपका आईडियल कौन हैं?
आईडियल जैसा कुछ हैं नही पर बचपन से प्रवीण कुमार के साथ खेला हूं. हमेशा उनसे ही सिखा हैं. जब भी परेशानी आती हैं उनसे ही बात करता हूं. उनका और मेरा गेंदबाजी का अंदाज भी एक जैसा हैं.
बल्लेबाजी मे मेरा नेचुरल अंदाज हैं. कभी आईडियल नही माना किसी को, बस सचिन की बल्लेबाजी काफी पसंद आती हैं.
कितनी जल्दी अपने आप को भारतीय टीम मे देखना चाहेंगे?
 
हर कोई जो भारत मे क्रिकेट खेलता हैं वो भारतीय टीम मे खेलना चाहता हैं. जल्दी या देरी जैसी कोई बात नहीं है. बस अपना अच्छा प्रदर्शन करना हैं. बाकी चयनकर्ताओ पर निर्भर करता हैं. 
यहा तक पहुचने का श्रेय किसे देंगे?
यहां तक पहुचने का श्रेय मैं अपने माता पिता और दीदी को देना चाहता हूं. जब पहली बार स्टेडियम मे गया था तब मै काफी छोटा था. तब मेरी दीदी मुझे खेलने ले गई थी. ये ऐसा लम्हा हैं जो हमेशा मुझे याद रहेगा. साथ ही मेरे कोच विपिन और संजय रस्तोगी को भी मे इसका श्रेय देना चाहूंगा उन्होने जो भी मुझे सिखाया हैं. उसी की बदौलत यहाँ तक पहुचा हूं.
नये खिलाड़ियों के लिये आपके सुझाव.
क्रिकेट एक ऐसा खेल हैं जिसमे काफी उतार चढाव आते हैं. तो इतना कहना चाहूंगा कि आप अपना फोकस हमेशा खेल पर ही रखें और अपनी ओर से मेहनत करना बन्द न करें.
आप अपना खाली वक्त किस तरह बिताते हैं?
गाने सुनता हूऔर दोस्तों के साथ घूमता हूं.
आपका पसंदीदा सिंगर कौन हैं.
सोनू निगम के गाने मुझे काफी अच्छे लगते हैं. उनके एलबम का गाना चंदा की डोली”मुझे काफी पसंद हैं.
अब तक का यादगार पल
सचिन को आऊट करना अब तक का सबसे यादगार पल रहा हैं. उस मैच मे 5 विकेट भी लिये थे साथ मे 80 रन भी बनाये थे तो वो मैच मुझे अब तक याद हैं.

 

ये इंटरविव मैंने 2011 मे दखलंदाजी की ओर से लिया था ।

 

Bhuvneshwar Kumar Ipl 2018, Bhuvneshwar Kumar Instagram, Bhuvneshwar Kumar Hattrick, Bhuvneshwar Kumar Test Debut, Bhuvneshwar Kumar Videos, Bhuvneshwar Kumar Interview, Bhuvneshwar Kumar First Ball Wicket, Bhuvneshwar Kumar First Ball Wicket Hd, Bhuvneshwar Kumar Height, Bhuvneshwar Kumar House, Bhuvneshwar Kumar Marriage, Bhuvneshwar Kumar Age, Bhuvneshwar Kumar Wife, Bhuvneshwar Kumar Caste