बूंद

खुशी हो या हो गम के दिन,
साथ हमेशा रहती है…. बूंद
,

 
ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली
,
साथ हमेशा रहती है … बूंद 

हर पल को देखकर ,
अपने अस्तित्व को बताने …बाहर आ जाती है …बूंद 

poem on water drop

खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी ,
हर बार साथ निभाती है ….बूंद . 

सोचो अगर ये बूंद ना होती तो क्या होता,
आँखों मे अहसास ना होता
,
बातो मे विश्वास ना होता
,
जैसे नदी की पहचान उसकी लहरे है
,
वैसे हमारी आत्मा है …बूंद 

C.J 

4 thoughts on “बूंद

  1. वाह भाई.., वाह.. क्‍या बात है। बहुत ही सुंदर रचना। मुझे बेहद पसंद आई। अच्‍छा लिखते हैं आप।

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