कुछ बातें

शब्दों के खेल में 

बातो के मेल में 

उलझते हैं दिल के सवाल कई 

 

शर्माती इठलाती हुई बातो में 

वो अनकही मुलाकातों में 

आँखों के इशारो में 

मिल जाते हैं मौसम कई 

 

छम-छम पायल की तेरी 

जुल्फों की छाव तेरी 

लबो से निकली वो बातें तेरी 

दे जाती हैं जवाब कई 

 

yaadein-memories

शाम तो रोज आती हैं 

लेकर चंदा को साथ अपने 

हवा भी चली आती हैं 

लेकर ख्याल कई 

 

जाम तो रोज रात में 

हाथ में होता हैं 

नशा चाहे हो न हो 

आईने में जब देखता हूँ 

तस्वीर अपनी  

तेरी चूडियो की खनक 

दिखाई देती हैं 

 (चिराग )

10 thoughts on “कुछ बातें

  1. वाह! क्या बात है! बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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