काश वापस आ जाये

काश वो दिन फिर आ जाये

पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 

नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 

काश वो दिन फिर आ जाये 

 

काश वो रबर फिर घूम जाये 

टिफिन काश वो फिर घर से 

लंच टाइम में पापा देने आये 

गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 

वापस आ जाये 

 

childhood-days

एनुअल फंक्शन का वो डांस 

वो नाटक की तयारी 

वो साइकिल की यारी 

काश वापस आ जाये 

 

वो साइकिल का पंचर होना 

वो कम्पास में से पेन चोरी होना 

वो ड्राइंग का  पीरियड

वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद

वो बुक से क्रिकेट खेलना 

काश वापस आ जाये 

 

 

wwf  का वो खुमार 

कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 

वो होली का हुडदंग 

वो संक्रांति की पतंग 

हट …काटा ……हैं  की

वो आवाज़ 

 

काश वापस आ जाये

 

वो दिन वो बीते हुए लम्हे 

आज भी जेहन में हैं मेरे 

बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 

और यादो को ताज़ा कर जाये 

(C.J)

17 thoughts on “काश वापस आ जाये

  1. पुरानी यादें ताज़ा कर दीं आपने। एक साथ बहुत से चित्र आँखों के सामने तैर गए….
    अच्छा लगा पुरानी यादों में लौटना ।

  2. किसी के भी जीवन के सबसे स्मरणीय और निश्चिन्त दिन यही होते हैं ,काश वो दिन आ कर वापस जाना भूल जाये …. शुभकामनायें !

  3. बहुत भाव पूर्ण कविता है |बधाई आप मेरे ब्लॉग पर आए बहुत अच्छा लगा |आप उज्जैन में रहते हैं
    जानकार बहुत प्रसन्नता हुई |हम लोग भी ऋषी नगर में {उज्जैन में ) रहते हैं |यदि आपने ऋषी नगर देखा है तो अवश्य मिलिएगा |
    आशा |मेरा पता :-
    हरेश कुमार सक्सेना
    c47 Rishi nagar ujjain

  4. हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गयी! बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने! पुरानी यादों को खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है! बधाई!

  5. बचपन की यादें ताज़ा कर गयी आपकी कविता !
    सुन्दर शेली सुन्दर भावनाए क्या कहे शब्द नही है तारीफ के लिए….

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