इश्क होता हैं दोस्ती के बाद

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद ,
नशा चढ़ता हैं  शाम के बाद


शोला यूँ तो धडकता नहीं दिल में ,
लगती हैं आग मन में
जब देखता हूँ तुझे किसी और के साथ ,

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद…….


कहना चाहूँ तुझसे जब दिल की बात 

बता दूँ तुझे तू क्या हैं मेरे लिए मेरी जान ,

love-and-friendship


सच को छुपाना आसान तो नहीं ,
पर झूठ मुह से निकलता हैं ,
तुझे देखने के बाद 

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद……. 

शोर जब सुनता हूँ  गली में ,
सोचता हूँ खुद को बंद कर लूँ घर में ,
पर सन्नाटा सुनाई देता हैं तेरे आने के बाद

 

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद……. 

(चिराग )

12 thoughts on “इश्क होता हैं दोस्ती के बाद

  1. शोला यूँ तो धडकता नहीं दिल में ,
    लगती हैं आग मन में
    जब देखता हूँ तुझे किसी और के साथ ,

    इश्क होता हैं दोस्ती के बाद…….

    I agree ! It goes like this only .

    Beautifully defined !

    .

  2. दोस्ती भी तो इश्क का ही एक रूप है.
    चिराग जी,सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.
    आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

  3. वाह! क्या बात है! बहुत सुन्दर लिखा है आपने! इश्क़ होता है दोस्ती के बाद..ये बिल्कुल सही है! हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गई! उम्दा प्रस्तुती!

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