90’s Childhood | काश वापस आ जाये

 

काश वो दिन फिर आ जाये

 

पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 

 

नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 

 

काश वो दिन फिर आ जाये 

 

 

 

काश वो रबर फिर घूम जाये 

 

टिफिन काश वो फिर घर से 

 

लंच टाइम में पापा देने आये 

 

गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 

 

वापस आ जाये 

 

90's Childhood

 

 

 

 

 

एनुअल फंक्शन का वो डांस 

 

वो नाटक की तयारी 

 

वो साइकिल की यारी 

 

काश वापस आ जाये 

 

 

 

वो साइकिल का पंचर होना 

 

वो कम्पास में से पेन चोरी होना 

 

वो ड्राइंग का  पीरियड

 

वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद

 

वो बुक से क्रिकेट खेलना 

 

काश वापस आ जाये 

 

 

 

 

 

wwf  का वो खुमार 

 

कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 

 

वो होली का हुडदंग 

 

वो संक्रांति की पतंग 

 

हट …काटा ……हैं  की

 

वो आवाज़ 

 

 

 

काश वापस आ जाये

 

 

 

वो दिन वो बीते हुए लम्हे 

 

आज भी जेहन में हैं मेरे 

 

बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 

 

और यादो को ताज़ा कर जाये 

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Poetry About Childhood | छोटी सी ख्वाहिश

 

जेब में कुछ सिक्के जो  होते ,

 

आसमान की सैर कर आते 

 

 

 

बदलो पर बैठकर जाते 

 

खुदा से कुछ बात कर आते 

 

 

 

नासमझ हैं पर फिर भी 

 

समझदारी की बात कर आते 

 

 

 

थोड़ी सी जिद करते

 

और जिद में

 

सबकी ख़ुशी मांग लाते 

 

 

 

छोटे छोटे हाथ हैं हमारे

 

पर बड़ी-बड़ी यादो को समेट लाते 

 

 

 

तुतलाती हुई जुबान से खुदा को 

 

डांट भी आते 

 

 

 

 

Poetry About Childhood

 

 

जब सब कहते हैं 

 

हम हैं तुम्हारे की स्वरुप 

 

फिर क्यों ठुकराते हैं 

 

डराते हैं ,मन पड़े तो मार भी देते हैं 

 

कुछ लोग हमें 

 

 

जब कहता खुदा हमसे के 

 

तुम हो मेरे ही बच्चे 

 

हम कहते के अपने 

 

बच्चो के खातिर कभी तो  धरती पर आ 

 

 

कभी कृष्ण बनकर 

 

कभी राम बनकर 

 

आये थे तुम धरती पर 

 

पर तुम्हे भी डराया था 

 

तुम हो भगवान इसीलिए 

 

तुमने सबको हराया था 

 

 

जब तुम्हे ही न समझ पाए वो पापी 

 

तो हम मासुमो को कैसे समझेंगे ….

 

(चिराग ) 

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वो लटे तेरे बालो की 

 

कुछ कहती वो निगाहे तेरी

 

 

होठ तेरे सुर्ख लाल 

 

करते हैं कमाल 

 

 

 

वो चुलबुला अंदाज़ 

 

वो मीठी सी आवाज़

 

 

जब जब देखता हूँ तेरी हसीं 

 

उस दिन का सबसे खुशनसीब पल होता हैं 

 

वो मेरे लिए

 

 

चाहता हूँ कोई ऐसी जगह हो

 

जहाँ बस तू और मैं रहे 

 

 

 

Poetry For Lover

 

 

 

हाथ मैं हाथ पकड़ कर चले

 

समंदर के पार 

 

चल ले एक नया अवतार 

 

 

हवाओ का करता हूँ मैं शुक्रिया 

 

क्योंकि जब -जब उड़ाती हैं ये तेरी जुल्फे 

 

तेरी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं

 

 

हसीनाये तो कई देखी मैंने

 

तुझसे हसीन ना देखी कही 

 

 

तारीफ़ और क्या करू तेरी अब 

 

बस इतना कहूँगा के 

 

अगर कोई पूछे मुझसे के

 

इश्क कैसे होता हैं 

 

तो बस इतना कहूँगा के

 

एक बार मेरे महबूब को देख लो 

 

समझ आ जायेगा कैसे होता हैं .  

 

 

 

(चिराग )

 


(P.S:-This poem is for a special friend)

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(चिराग )

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