Ransomware Attack

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप
“ हैलो……. कौन “ अबे बारीक मैं बोल रिया हू । “ अरे वाह यार भिया गजब कर रीये हो , इधर से भी तो मैं ही बोल रिया हू ” । “ अबे ओ पंचर , मैं पप्पू बोल रिया हू रितिक “। “ अरे यार वो क्या है नी कल वो एक फिलम देखी तो उसी का डायलाग चिपका दिया, क्या आपकी आवाज़ नी पेचानेंगे क्या यार “। “  चल अब बत्ती मत दे, एक दम फटाफट से मेरे कने आजा “। “  क्यू यार भिया क्या हो गिया “। “ अरे तू आये नी यार और मैंने वो छोटू, उमेश ने टीनू को भी बोल दिया है वो भी आ रीये है “। “  हओ भिया बस अभी आया,  नी-नी करके पांच मिनिट मे पोच जाउंगा “।

 

टीनू,उमेश,छोटू और रितिक चारो पप्पू भिया के यहा पहुच गये । उन्होने देखा के पप्पू भिया अपने लैपटाप को घूरे जा रे थे । रितिक –“ पप्पू भिया क्या देख रे हो इस लैपटाप मे क्या कोई नयी फोटू आयी क्या ऐश की “। उमेश –“ ऐसा क्या भिया , दिखाना जरा “। उमेश ने लैपटाप देखा  और बाकी सब से कहा –“ पप्पू भिया हम पर शक कर रिये यार “। टीनू – “ कई वीयो तू असो काय वास्ते कई रीयो है “। उमेश – “ पप्पू भिया ने लैपटाप पर ताला लगा रखा है, ताकी हम ऐश भाभी को देख नी सके “। रितिक- “ पर यार तुम मानो नी मानो , भिया का लव जोरदार है , ऐश भाभी एक बच्चे की मॉ बन गी , पर भिया आज भी उसे अभिषेक से ज्यादा चाते है “।

 

 

 पप्पू- “ अबे ओ गेलियो चुप करो , कोई फोटू नी आया है और ये ताला मैने नी लगाया है “। उमेश-“ फिर भिया ये क्या हो गया “। पप्पू – “ पता नी यार , सुबह जैसे ही अपन ने लैपटाप खोला तो ये ताला मिला ,मैंने पूरे घर मे ढूढ लिया पर साला चाबी नी मिली यार , मेरे को लग के अपन दिनभर इसको रांदते है इसिलिये अम्मा ने लगा दिया होगा ताला “ । टीनू- “ भिया अम्मा से पूच लो “। पप्पू – “ अरे पुछा था “। रितिक- “ तो क्या हुआ फिर “।

पप्पू भिया ने एक रख के दिया रितिक को और कहा –“ ये हुआ “। रितिक- “देखो भिया ये जो लिखा है – Ransomeware, इसमे भिया Ran का मिनिंग तो दौडना होता है , some का मिनिंग तो कुछ होता है , अब ये अगला समझ नी आ रिया है “ । उमेश- “भिया एक मिनिट रुको मैं जरा गुगुल चलाता हू, ये को मिनिंग देखता हू “।

टीनू- “ अबे वणे गुगल केते  है रे गेलिया “। उमेश ने सर्च लिया- “ भिया देखो ये जो ware लिखा है , इसका मिनिंग है – सामान “ । टीनू- “ तो इसका मतलब ये हुआ भिया के दौडतेकुछसामान “। उमेश- “ भिया मेरे को लगे वो दुसरे धरती के जीव है नी वो फिलम मे थे जो – जादू, वो तुमसे कुछ केना चा रिये है “।

 

 पप्पू भिया ने उमेश से मोबाइल लिया ने खुद सर्च किया वो भी पूरा लेटर एक साथ – “  अरे वो तुम लोग बस दिन मे दो बार पोहे खाओगे तो ये ही होगा, गेलियो ये तो कीडा लग गया वो अंग्रेजी मे जिसको वाईरस केते है नी वो और ये फिरोती वाईरस है “ रितिक- “ भिया इसको नी अपने राकेश भिया की दुकान पर ले चलो वो करते ये सब काम “।

 

राकेश भिया की दुकान पर ,पप्पू – “ भिया यार देखना ये कोई वाईरस ने ताला मार दिया है यार लैपटाप पर ने फिर चाबी भी नी दे रिया है “। उमेश- “ हा भिया दिमाग खराब हो रिया है यार “। राकेश ने देखते ही कहा –“ भिया एक मिनिट “, फिर उसने तबांकू थूका और कहा –“  भिया ये वायरस आया है नी इसने तुम्हारी सारी फाईल लाक कर दी है और अब तुम्हे अगर चाहीये तो 300 बिट्काईन मांग रिया है “ रितिक जोर से हसा और कहा –“ क्या गेलिया वाईरस है , इतनी मगज़मारी तीनसो सिक्के के लिये “ उमेश- “  भिया ऐसा लगे इसके घर मे शादी है और खुल्ले पैसे देने मे बैंक वाले ऐबलेपनती कर रिये होंगे तो इसने तुमसे मांग लिये “। राकेश- “  अरे वो लफ्नदरो , पगला गये हो क्या ,पप्पू भिया तुम भी कहा इनके साथ घुमते हो “। पप्पू ने घूर के सबको देखा ।

 

राकेश- “ भिया यार ये जो है नी बहुत बडा वाइरस है और 1 बिटकाईन मतलब अपने यहा के – 133621 रुपेये है और अब अगर तम्हे अपना डेटा चिये तो 300 बिटकाईन देने पडेंगे “  पप्पू भिया को पसीने आने लगे । रितिक – “ भिया, अभी हा के दो फिर ये पैसे लेने आयेंगा तो इसे घेर लेंगे और चाबी ले लेंगे “। राकेश- “ अबे ऐ फर्जी ये पैसा आनलाईन देना पडेंगा और पप्पू भिया तुम बताओ कल रात को क्या चला रिये थे इसमे “। पप्पू – “ अरे राकेश भिया वो तुम्हारी ऐश भाभी का मेल आया था ने उसमे लिखा था “ आई लव यू “ और साथ मे एक लेटर  भी था, अब अपन ने वो डाउनलोड किया ने फिर अचानक से अम्मा आ गई तो बस फटाफ़ट से लैपटाप बंद कर दिया ने सुबह देखा तो ये लफडा हुआ “।
राकेश जोर से हसा और कहा भिया तुम्हारा डेटा मैं ला दूंगा इसे बाहर भेजना होयेगा और 5 हजार खर्चा आयेगा “। पप्पू – “ कम मे नी होगा, देख लो “। राकेश –“  200 रुपये मे भी कर दुंगा फिर डाटा नी मिलेगा “। पप्पू ने भरे मन से कहा – “  चलो कर दो यार भिया , अब ऐश की फोटू मेरे दिल मे भी है उसीसे काम चला लूंगा “। रितिक –“  अरे उदास मत हो  भिया चलो मैं ला दुंगा ना तुमको भाभी की फोटू “ । पप्पू- “ अबे तेरे पास क्यो है ऐश की फोटू , भाभी पे लाईन मारता है “ रितिक- “अरे यार भिया क्या बात करा दी ,वो सारी फोटू तुम्हारे साथ है जो हमने बनवाई थी, चलो अब पोहे जलेबी खिलाओ” । सब लोग चले गये फिर पोहे खाने राजबाडे पर ।

 

तो भिया ये थे हमारे पप्पू भिया, कमेंट करना और बताना कैसा लगा इस बार का “तिरभिन्नाट पोहा” और हा फेसबूक ने और जगह लाईक और कमेंट देते रेना , चलो मिलते है फिर भिया ।

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तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया

 

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन

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Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा

तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया
भियाओ…. कैसे हो सब लोग । क्या चल रिया है । तो मतलब ऐसे करोगे मतलब … मैं देहरादून क्या आ गिया । तुम सब अपने को भूल ही गिये ।

बहुत दिन से सोच रिया था मैं के तुम सबसे बात करू वो क्या है नी के इधर एक तो लैंगवेज़ की दिक्कत है । अरे यार पार्टी तुम भी नी यार , लैंग्वेज़ नी समझे । अरे लैंगवेज़ याने भाषा अब ऐसा नी है के इधर हिंदी, अंग्रेजी नी बोलते पर अपना क्या है नी के अपन तो तरर्तराट है  हिंदी ने अंग्रेजी मे पर क्या है नी साला इधर कोई “ इंदौरी “ या “ मालवी “  नी बोलता यार ।

अब अपन तो क्या भिया उज्जैन के रेने वाले है । अब अपने को तो क्या है के कोई इंदौरी मे बात करे तो लगता है इज्ज्त दे रिया है  या फिर “ ओर कई मारसाब ,कई चाल रियो है “ । ऐसा के दे तो लगे के सम्मान दे रिया है । तो आज फिर सोचा अपन ने सोचा के तुम सब इंदौरी , उज्जैनी और अपने मालवा वालो से बात की जाये ने फेर कई अपणो मन भी तभीज़ लागे जब कोई अपणी लैंगवेज़ मे बात करे । अच्छा अब थोडा बता दू तुम सब छोकरा ओन के , के इसका नाम “तिरभिन्नाट पोहा” क्यो रखा । तो सुनो रे सब , अरे वो गुड्डू को बुला ले रे , दिनभर टेशन की सवारी ढूढ्ता रेता है । तो भिया ऐसा हुआ के अपन हर दिन की तरह दिन उगेज , पोहे की पलेट लईने बैठी गिया ने बडे आराम से अपन खा रिये थे । अचानक अपने को लगा के यार भिया जीरावन कम है तो जैसे ही अपन ने जीरावन डाला और पोहे खाये ये आईडिया भिन्नाते हुये अपने दिमाग मे आ गिया तो फिर अपन ने ज्यादा सोचा नी और रख दिया नाम “तिरभिन्नाट पोहा” ।

 

 

तो भिया इस “तिरभिन्नाट पोहा” मे अपन कोशिश करेंगे के हर हफ्ते बात करते रहे ने फिर कभी किसी हफ्ते अपन नी आ पाये तो तुम भेज देना एक “तिरभिन्नाट पोहा” अपन उसे चिपका देंगे अपने ब्लाग पे ।

 

तो भिया अपन जो है 27 जून 2016 को देहरादून आये ने फिर क्या है 26 जून 2016 को अपन उज्जैन से चले तो अपन ने साम के नी-नी करते सात बजे नागदा मे पोहे खाये थे । अब जब 27 जून को 1 बजे अपन यहा आये तो अपने को दो चीज़ की तलब लगी एक तो चाय ने दुसरा पोहा । अपन ने सोचा के चलो अभी तो  यूनिवर्सिटी चलते है फिर देखेंगे वहा जा के ने करेंगे कोई जुगाड । तो भिया अगले दिन यूनिवर्सिटी मे जाईन हो गये ने फिर एक हफ्ते मे अपन ने घर ले लिया किराये पे । अब क्या है के सात दिन हो गये ने पोहे नी खाये तो रविवार के दिन तो ऐसी तलब लगी पोहे की के क्या बताऊ मतलब आप मानोगे नी , सिर घुमने लगा ने चक्कर आये ,बिस्तर से उठा नी जाये ।
फिर भी अपन चले बज़ार अब अपने को डाऊट तो था के यहा कहा पोहा मिलेगा पर अपन जो है नी है तो बाबा महाकाल के भक्त । एक लोटा भांग पीने के बाद अपना कानफ़िडेंस तो टपकता लगने लगता है और फिर भांग नी पियो ने जैसे ही “ जय श्री महांकाल “ बोले अपने कानफिडेंस की तो नदीया बहती है तो अपन जो है “ जय श्री महांकाल बोलके ” ने निकल लिये बज़ार मे । अपन सबसे पेले तो एक ठैले वाले के पास गिये उससे की मैंने “भिया एक कट देना “ तो पता है उसने क्या किया ? वो बोले “ भाईजी चाय पीनी है “ । मेरा मन तो हुआ के उसे सुनाऊ फिर सोचा चाय पीले फिर चमकायेंगे ।

अब चाय आयी ने अपने ने उससे कहा के “ भिया एक प्लेट पोहा भी दे देना “ उसने मुझे ऐसे देखा, जैसे अपन ने जने क्या मांग लिया हो । उसने कहा –“ यहा पोहा नही मिलता , हम पोहा नही बनाते “ मैंने कहा  “ ठीक है यार , तुम नही बनाते , पर ये हम मतलब और कौन है जो नही बनाता अभी बता दो फालतू चक्कर नी काटने पडेंगे  “ उसने कहा – “ भाईजी हम तो नही बनाते , बाकी का पता नही , आप वो आगे वाले ठेले पर चले जाईये और “मोमो” का नाश्ता कर लिजीये “। मैंने सोचा ये कौंन-सी नयी डिश आ गई है ।

 

खैर मैं वो जगह छोड कर आगे गया और आप मालिक विस्वास नी करोगे नी-नी करके पूरा देहरादून घूम लिया पर कही भी पोहा नी मिला ।  थक गया,  फिर देखा के एक दुकान पर समोसे बन रहे थे । मैंने सोचा कोई नही पोहा ना सही समोसा ही सही । उसने समोसा दिया , अब वो दिखने मे तो ठीक दिख रिया था । अरे पर जैसे ही मैंने पहला कोर खाया लगा के समोसा है या बडी मठरी । समोसे मे पूरे मे अजवाईन का स्वाद आ रिया था और जैसे ही मैंने मसाला खाया ,मेरे को लग गिया के भिया यहा खाने को नी मिले ।
ऊ हू ,कच,कच ऐहे ऐहे बिल्कूल नी मिले । अब कई थकी हारी के मणे वणती की के लाला थोडी चटनी दई दे  । मतलब मानोगे नी आप भिया चटनी थी के परफ्यूम की बोतल ,अलग ही खूशबू आ रही थी । ने बस खूशबू ही आ रही थी । आखिर मे मेरी नज़र जलेबी पे टीकी मैंन सोचा की ये तो पूरे भारत मे मिलती है ये तो बढिया होगी । भिया जैसे ही पेला  टुकडा मुह मे रखा , बस मेरे तो आखो मे आसू आ गये , बस फिर मे चुपचाप दुकान से कच्चे पोहे ले के ने रुम पे गया ।  जाके ने बनाये फिर पोहे ने सेव डाल डाल के खाये ने हर स्वाद मे इंदौर उज्जैन के पोहे जलेबी वाले बहुत याद आये ।

 

तो भिया था एक किस्सा “तिरभिन्नाट पोहा” का आगे और भी बकर करेंगे ने मिलते रहेंगे । अच्छा अब अपने कमेंट्स जरुर देना क्योंकी भिया यहा देहरादून मे तुम ही और कौन है अपना ।  चलो भिया फिर मिलेंगे किसी नये विषय पर बात करेंगे ।

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