तिरिभिन्नाट पोहा- पोहे-जलेबी का उधार | Poha Jalebi

 भिया राम  –रितिक  ने दूर से आते उमेश को देखकर कहा ।   जय श्री राम रितिक और कई चाली रियो है , तू दिखियो नी यार घणा दन थी ।  हा यार वो क्या है नी के अपना वो धंधा बंद हो गया था नी ने फिर अपने कने  पईसे आने वाले थे विदेश से वो भी नी आये , तो वो कालू है नी उसका पोहे जलेबी का उधार भोत हो गिया था । बस इसिच लिये अपन जो है नी अंडर ग्राऊंड हो गे थे ।

तो असो थो म्हारे लागयो के तू फेर कणी छोरी ने लेके भागी गियो है , पिछली बार तू ऊ पडोस के मोह्ल्ला की छोरी के भागी गयो ने फिर कई दन तक नी दिखियो थो । अरे यार उमेश भिया तुम भी ना मजे मत लिया करो , वो तो वो लडकी अपने पे फिदा थी ने फिर अपन नी भागे उसको लेके वो पप्पू भिया ने जबरदस्ती  बांध दी अपने गले ।  केने लगे के इससे इम्प्रेशन बढेगा ने लोग जानेगे फिर के रे थे के चुनाव आ रहे है तो तू फिर पापूलर होगा तो चुनाव भी जीत जायेगा ।

अपने पप्पू  भिया भी ना यार उमेश कभी कभी पगला जाते है और फिर अब उनकी जरुरत है ने देखो गायब है । एक तो पोहे –जलेबी की तलब है , विदेश से पईसा नी आ रिया है और अपने भिया कही छुप के बैठे होंगे । नी यार कई बात कर रियो है तू , पप्पू भिया तो महान इंसान है रे, वणा के वारे मे असी बाता मत कर । अरे नी यार उमेश भिया तुम भोत भोले हो , मैंने तो सुना है पप्पू भिया पर भी कालू का भोत उधार है , इसिलिये आजकल दिख नी रिये है । डर के बैठे होयेंगे कही ने फेक रहे होंगे लम्बी –लम्बी ।

पप्पू भिया ये सब सून रहे थे और उमेश ने पप्पू भिया को आते देख लिया था ।

क्यो रे गेलिये रितिक क्या बोल रिया था रे तू मेरे बारे मै के मैं डर रिया हू ।  पप्पू भिया ने रितिक को देखा ने दे रेपट, दे रेपट ने दे रेपट  ।  रितिक को ऐसा लगा के वो फ्री मे ही सरवटे, भवरकुआ और राजबाडा घुम आया । अरे यार भिया तुम बुरा मान गये यार , मैं तो मजाक कर रिया था ने मैंने तो सुना है तुम इस बार हम सबका पोहे-जलेबी का उधार माफ करवा रहे हो । हा यार दादा करवाई दो अणी बार नी तो फेर मांगी मांगी ने पोहा ने जलेबी खाना पडेगो । अरे तुम चिंता काहे कर रिये हो छोकरो ओन , इस बार अपने भिया खडे हो रे है चुनाव मे ने अपन अभी बात करके आ रे है उनसे , उनने का है के अगर इस बार उने वोट दिया चुनाव जीतने के  दस मिनिट मे अपन सब का पोहे-जलेबी का उधार चुका देंगे । भिया तमारो भी उधार है कई , तम तो कई रिया था के तमारो कई उधार कोनी ने फिर यो रितिक ने कियो तो तमने अणकी हवा उडाई दी ।

अरे नी रे उमेशिया , अब असो है के एक दन कई इंडिया को मैच आई रियो थो ने गली मे अपन देखी रिया था ।  वा कई दो छोरा ओन ने शर्त लगाई की जो हारेगो पूरी गली के पोया ने जलेबी खिलायेगो । अब जो छोरो हारी गयो वो रोवा लागी गयो , तो फिर अपन तो कई दरियादिल है तो फेर अपन ने सबके वणकी तरफ थी पोहा ने जलेबी खिलाई दिया तो वो पैसा अभी देना है कालू के अब भिया चुनाव लडी रिया है तो अपणा भी माफ कराई लेगा ।

वा भिया मतलब मान गये आपको , मतलब आपने जो काम किया है नी , आने वाले सालो मे कोई नी कर पायेगा ।

कुछ दिन बाद चुनाव हुये और भिया जीत गये ने पप्पू, रितिक और उमेश नाचते हुये जुलूस के संग पोच गये भिया के घर ।

भिया तमने तो की थी के दस मिनिट मे उधार माफ करी देगा , दो घंटा बीती गया ने अबार तक कोई खबर नी ।  अरे गेलिया आज तो जितिया है शाम तक करी देगा माफ, असो उतावला मत होये ।  उमेश तू भी ना यार , पप्पू भिया ने की है तो जरुर होगा ।

अगले दिन तीनो कालू की दुकान पर गये , अरे कालू भिया तीन प्लेट पोहे ने 100-100 ग्राम जलेबी दे दो । अब तो उधार माफ हो गया हमारा ये देखो कागज़् । कालू ने कागज़ पढा और दो प्लेट पोहे ने जलेबी लगाने को के दिया । उमेश ने कालू से कहा – भिया म्हारा से कई नाराजगी हेगी कई , तम म्हारे पोहा नी दे रिया हो । अबे झंडू तेरे को और रितिक को दे रिया हू ।  पप्पू भिया ने जैसे ही सूना उनका पारा आसमान के पार हो गया ।

 अबे कालू तेरे को समझ नी आ री क्या , अपने भिया चुनाव जीत गये है और सबका उधार माफ कर दिया है । अबे पप्पू तेरे से ज्यादा पढा हुआ हू इसमे साफ साफ लिखा है के उधार माफ करो पर उसका जिसका सिर्फ 500 रुपये का उधार है और तूने तो आजतक उधार मे ही खाया है।  अबे कालू । अबे पप्पू चुप रे नी तो तेरे चेलो के सामने बता दूंगा के उस दिन गली मे तूने शर्त लगाई थी के पाकिस्तान जीतेगा ने तेरी तो कोहली से बात हो गई है ने उसे मोदी ने कहा है के इमरान को तोहफे मे दे दो ये मैच । फिर तू शर्त हार गया था ने  सबको पोहे खिलाये थे 1000 रुपये तो उस दिन हो गे थे ।

पप्पू भिया के इज्जत के कचरे हो चुके थे ।  वो अपने चेलो से आंख नी मिला रे थे ।  अरे यार कालू भिया अपने खाते से दे दो या पप्पू भिया को पोहे, इन्होने अपनो को भोत पोहे खिलाये है।  हा यार दई दो अणा भी एक प्लेट पोहा , यू भी यो तम्हारो   उधार अणी जनम मे तो नी चुका पायेगा । ई अणी बार उपर वाले के कई के आया है म्हारा वजह थे लोग तम्हारे याद करेगा ।

पप्पू भिया ने सुना थोडा गुस्सा दिखाया और फिर सब एक साथ हस पडे ।

 तिरभिन्नाट पोहा- इंडिया व्र्सेज आस्ट्रेलिया

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन
Indori Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा-सख्त लौंडा
तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया
तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप

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Indori Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा-सख्त लौंडा

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रितिक – “ भिया राम , और का थे इत्ते दिन से दिख नी रिये थे “ । पप्पू भिया- “ अरे रितिक यार क्या बताउ अपन यार दिल्ली चले गे थे “। रितिक- “ भिया वा क्या करने गे थे “। इतने मे उमेश का आना हुआ –“ भियाओ…जय श्री महाकाल , और कई अतरा दिन थे का था तम दिखिया कोणी ?मने तमारे भोत ढूंढ्यो दादा ?तम मानोगा नी महाकाल मंदिर के बाहर मने रोज़ चक्कर काट्या ने अणी चक्करा मे जूता भी पडी गिया “। पप्पू भिया-  “ अबे गेलिये तू म्हारे महाकाल मंदिर के बाहर काय वास्ते ढूंढी रियो थो “। रितिक- “अरे भिया वो तुम कांड कर गये थे नी इंदौर मे ,राजबाडा परवो एक ने जब जीरावन कम डाला पोहे मे तो तुमने उसको भोत मारा था ।
फिर वो टी.आई तुमको कब से ढूंढ रे थे नी ।“ उमेश- “ हा भिया अणी वास्ते म्हारे लागियो के तम जो है नी कबार वी भिखारी बैठे नी महाकाल के बाहर वा बैठिया होयगा ने तमारे देखवा के चक्कर मे मणे कई एक भिखारी को कटोरो छिन लियो ने फिर जो म्हारी धुलाई की नी भिया कई बताओ तम्हारे । म्हारे तो लाग्यो के ई सब पुलिस वाला ओन के कोई मिल्यो कोणी मारवा वास्ते तब हीच म्हारे उडाई दियो “। ये सब सुनने के बाद पप्पू भिया का दिमाग गरमा गिया ने उनने दोई छोरा ओन के लगाये थप्प्ड ,दे थप्प्ड ,दे थप्प्ड । पप्पू भिया- “ अरे तुम दोनो भी है नी भाग मत खाया करो सुबह सुबह । अपन तो क्या है छोटे दिल्ली इसलिये गये के यार यहा क्या वो पिछ्ली  फरवरी मे कई अपने को नी-नी करके 1000 तो प्रोप्रोज़ आये “। रितिक-“भिया प्रोप्रोज नी यार प्रप्रोज होता है “।


पप्पू भिया-“हा रे वहीच
,तो क्या छोटे तेरे को याद है नी – नी करके 200-300 का जवाब तो लिखा अपन ने पर अब सबको थोडे ना लिख सकते है । फिर अपन क्या यार नरम दिल इंसान है । इसिलिये अपन जो है जाकिर भाई के पास गये थे “।

उमेश- “ दादा ,जाकिर ऊ तबलो बजावे ऊ दादा “। पप्पू भिया – “ नी रे ऊ नी यार , यो है नी अपने मालवा ,ने अपने इंदौर का लौंडा है “। रितिक- “ तो भिया के कोई बाबा वगेरह है क्या” । पप्पू  भिया –“ नी यार वो नी रे , ये क्या छोटे सख्त लौंडा है “। उमेश- “सख्त भिया मने था बनिया है कई ई दादा “। पप्पू भिया – “ अबे गेलिये ,ये भिया जो है नी छोरियो के सामने पिघलते नी है भिया ने इसकी ट्रेनिंग देते है वा दिल्ली मे “।
रितिक-“ वा भिया ,तुम तो गजब निकले तो मतलब अब शादी नी करोगे तुम , चलो बढिया अब तुम वो जिसको रोज़ टावर पर मद्रासी डोसा खिलाते थे उसको अपन घुमा ले आज “। पप्पू भिया- “ अबे तू खायेगा रे , सख्त लौंडा मने के अब जो है अपने को रिझाना आसान नी है “। उमेश- “ चलो भिया शाम को देखांगा मेला मे चलांगा ने करांगा त्म्हारा टेस्ट ने पतो लग जायेगो के तम पिघलोगा के नी “। पप्पू भिया- “ हओ रे देख लेना” ।

 

शाम को तीनो मेले मे पहुचते है । रितिक- “ भिया उधर देखो ये तो वही है नी जिसे तुमने रामघाट पर प्रपोज किया था ने फिर इसके भाईयो ने तुमको नृसिह घाट पर धोया था “। पप्पू  भिया –“  हओ रे अपने को कई फर्क नी पडता यार ,ऐसी भोत आती है और फिर अपन ने तो क्या प्यार के चक्कर मे मार खाली ने फिर उस दिन रक्षाबंधन भी था । कई अपन मार देते तो वो अपने को राखी बांध देती ना “। उमेश- “पप्पू भिया,वो देखो कतरो बडो झूलो “।

पप्पू भिया – “ हा दिख रिया है रे गेलिये” । उमेश- “ पप्पू भिया ,तम है नी अणे झुला थे भी बडी-बडी फेको” । पप्पू भिया ने फिर लगाये दो थप्पड उमेश को । रितिक-  “उमेश यार एक काम करते है फोटू खिचवाते है मेले मे “। तीनो फोटो स्टूडियो पहुचे वहा उमेश और रितिक दोनो अलग अलग हिरोइन के पूतले के साथ फोटो खिचवा रहे थे । उमेश-“भिया आओ नी तम भी खिचवा लो एक आध फोटू “। रितिक-“अबे उमेश पप्पू भिया सख्त लौंडे है वो नी पिघलेंगे “। तभी उमेश की नज़र ऐश्वर्या के पुतले पर पडी और वो झट से उसे ले आया और फोटो खिचने के लिये केने लगा । पप्पू भिया ये सब देख रे थे कुछ देर तो रुके ने फिर जाकर उन दोनो से बोले –“ देखो रे लौंडो वैसे तो अपन है तो सख्त लौंडे पर या अपण पिघली गिया यार । चलो तम साईड मे वी जाओ ने अपन को फोटो खिचवा ने दो ऐशवर्या जी के साथ “।

 

उमेश और रितिक पप्पू भिया को देखकर मन ही मन हस रहे थे ।

 

 

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तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन

 

तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया

 

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप

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“यार उमेश बोत दिन हुये ये पप्पू भिया नी दिख रे है “ –रितिक ने कहा । “ हा यार मैं भी काम के चक्कर मे उधर जा नी पा रिया हू ने फिर शाम को पानी आ जाता है नी तो फिर अपन कहा पप्पू भिया को ढूढो “ –उमेश ने कहा । रितिक –“ क्यो रे गेलिये पानी का पप्पू भिया से क्या लेना देना “ । उमेश-“ अरे यार पिछले साल बारिश गिरे ने के पप्पू भिया का फोन आये , ने फिर मेरे से के चल चले अड्डे पे “। रितिक –“ अबे तो दारू हीच तो पीने का के रिये थे कौन सा तेरे को तीर्थ करवा रिये थे “। उमेश-“  अबे नी यार , तू समझियो कौणी , पप्पू भिया शुरु के 2-4 पैक तो ऐसे पीये जैसे कोई मैजिक सिगनल खुलते ही दौडे ,ने फिर उने चढ जाये ने फेर अपणा नी पीन दे, बार –बार दे लप्पड- दे लप्पड ने के दारू पीना बूरी बात है “।

रितिक ने दूर से पप्पू भिया को आते देखा और कहा –“अरे नी यार अपने पप्पू भिया ऐसे नी है वो तो सज्जन आदमी है , पीयो और पीने दो मे विसवास रखते है रे “। पप्पू भिया उमेश के पीछे आकर खडे हुये और रितिक को चुप रेने का इशारा किया । उमेश –“अबे गेलिये तेरे को सज्जन दिखते है , तू और पप्पू भिया दोनो ही सर्किट हो “। ये कहते हुये उमेश पलटा और पप्पू भिया को देख के जो उसकी आवाज़ अब तक न्यूज़ रिपोर्टर की तरह फर्राटे से चल री थी वो एक नर्वस इंटरविव देने वाले सरीकी हो गई । उमेश-“  अरे भिया मैं तो के रिया था के पप्पू भिया हमारी बिमारी , हमारा दर्द अपने पास रख लेते है , जैसे भगवान भोलेनाथ ने विष पिया था वैसे ही ये हमे बचाने के लिये दारू पी लेते है “। पप्पू भिया ने ये सुनते ही दो लप्पड उमेश को लगाये और कहा –“ गेलिये भोलेनाथ का मज़ाक उडाता है “।

 

रितिक –“अरे भिया इसे छोडो ने ये बताओ कहा थे इत्ते दिन , ने वो मैच है यार कल ने कोई टिकीट की जुगाड नी हुई भिया “। पप्पू भिया-“ अरे रितिक , इसीज़ काम से तो गिया था मैं “। उमेश –“भिया इतना टेम तो शादी के कारड प्रिंट करवाने मे नी लगता उससे ज्यादा तुम्हे मैच के टिकीट प्रिंट करवाने मे लग गिया, क्या हाथ से पैंट कर रिये थे क्या “।

पप्पू भिया को फिर गुस्सा आ गिया और दे लप्पड –दे लप्पड उमेश को । पप्पू भिया – “ अबे नी बे बारिश एक तो अपने इधर होई नी तो पेले मे रिशीकेश के जंगल मे गया ने वहा अभी सिहस्थ मे दो चार बाबाओ से अपनी जो भेट हुई उनसे मिला ने बारिश का उपाय पूछा । फिर जो उपाय बताया तो किया अपन ने उपाय दो दिन बाद मैंने पेपर मे पढा के इंदौर मे जोरदार बारिश हुई । पर अपन क्या थोडा ज्यादा मे विसवास रखते है तो अपन ने उपाय मे सामग्री ज्यादा डाल दी जैसे अपन जीरावन ने सेव डालते है नी वैसे , इसिलिये तो बारिश अब तक हो री थी । “
 
 
रितिक- “ वा भिया तुम तो बहुत पोचे हुये निकले पर फिर  बारिश तो रुक गी थी और फिर भी तुम काफी दिन मे आये , वही रुक गे थे क्या भिया “। पप्पू भिया –“ नी बे , वो वापसी मे आ रिया था वो  रवी का फोन आया ने किया के यार मैच है तुम्हारे यहा ने पानी गिर रिया है और बोले के अपन सोच रे है पेले तीन जीत के सिरीज़ जीत ले तो फिर नये छोरो को चानस देंगे । अब अपना दिमाग फिरा अपन ने फिर उस बाबा को जैसे तैसे ढूंढा ने बारिश को भारत मे दुसरी जगह करवाने का उपाय किया और फिर रुका पानी “।
उमेश- “भिया मान गये , तुम्हारे पैर कहा है , छूना है “। पप्पू भिया- “रेनदे , सैंडविच पर घी मत लगा “। रितिक- “ भिया वो सब ठीक है पर ये रवि कौन है और कौनसे मैच की के रिया था , कही वो अपना मरीमाता वाला तो नी “। पप्पू भिया – “नी रे ऐबले , मैं रवि शास्त्री की के रिया हू , भारत की क्रिकेट टीम का कोच “। उमेश – “तो भिया तुम फिर तो रेडिसन गये होंगे कल “। पप्पू भिया – “ हओ रे , ऐयरपोर्ट से रेडिसन के बोत चक्कर लगे ने उसके पेले अपन राजबाडे मे बरसाती वाले के यहा गिये ने उसको आर्डर दिया ने बास वाले से बास और चार छोरे लेके ,स्टेडियम के उपर बांध दी बरसाती ने उसकी रस्सी अपांयर को दे देंगे, जैसे आजादी वाले दिन झंडा फेराते है नी बस वैसे ही पानी आते ही अपांयर रस्सी खेंच देंगे ने बरसाती से पूरा स्टेडियम ढंक जायेंगा ।“ 

रितिक –“ गजब भिया, तुम या क्या कर रे हो तुमे तो मतलब साईटिस होना था “। पप्पू भिया- “अबे अब समाज सेवा कौन करेगा अगर मै साईटिस बन जाऊ तो “। उमेश –“ भिया पिलेयर से मुलाकात हुई के नी किसी से “।

पप्पू भिया-  “अबे क्या के अब, सबके अपने स्टाईल का खाना  धोनी भिया के लिये सुबह चार बजे उठ के ने वो पाटीदार से 6 लीटर दूध लाया,कोहली भिया को ना जाने कौनसी मछ्ली चिये थी ने पिछली बार उनने इस चक्कर मे पोहे नी खाये तो फिर मछली बज़ार जाके ने मछली लाये ने वो मछली भी उज्जैन के एक तालाब मे मिली बताओ अब । ने फिर कुछ पिलेयर तो अपने सज्जन है जैसे रहाणे उसको खजराना जाना था उसको अपन ने वहा पोचा दिया ने बढिया पूजा करवा दी ।
अब एक वो पांड्या , अजब स्टाईल कर रखी है उसने मैंने रवि भिया से की थी के यार इसको सही करवा दो कही पुलिस परदेशीपुरा का समझ के धर नी ले पर नी माना,निकल गिया अकेले बजार मे ,अब अपने यहा की पुलिस बोत स्ट्रिक्ट है ।तो धर लिया फिर वा जाके उसे छुडाया । “ उमेश –“ भिया  भिया भिया” । पप्पू भिया-“ हा यार उमेश अब क्या करे करना पडता है अच्छा कल मैच के बाद रात को दो बजे सराफा आ जाना उधर अपन ने  एक पार्टी रखी है दोनो टीम के पिलेयर आयेंगे ने जम के करेंगे नाश्ता , वो आस्ट्रेलिया वाले तो मान गे फिर विराट भिया को भी समझाया के फिटनेस ठीक है पर कभी- कभी चलता है ने फिर अपने इंदौर का स्वाद भी गजब है और आखिर मे अपन ने रामबाण फेका और अनुष्का भाभी से केलवा दिया फिर तो मानना ही था , क्यो है ना रितिक और उमेश “।

 

रितिक और उमेश पप्पू भिया को दंडवत प्रणाम कर रे थे ।

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तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन

“ क्या भिया ? बोत दिन से दिख नी रिये हो । पेले रविवार भी तुम्हारा इंतेजार किया हमने नी-नी करके 2 घंटे तक राजू को पोहे नी बनान दिये के यार रुक जा अभी आ रिये होयेंगे पप्पू भिया पर तुम आये नी यार, ऐसा थोडा नी चलता है ” – रितिक ने दूर से आते हुये पप्पू भिया से कहा  । “ अरे यार बारीक क्या बताऊ यार वो एक तो पेले शनिवार को वो मैच के चक्कर मे रे गे और सुबह नींद नी खुली , वो मैच के बाद जो नाचे नी यार के क्या बताऊ , अपन सरवटे पर चिल्ला रिये थे ने आवाज़ एम.वाय तक आ री थी  । “

 

“ वो रविवार तो उसमे निकल गिया ने फिर यार ये अपने किसान भाईयो ने आंदोलन कर दिया “। रितिक-“ हा यार भिया ये तो गजब ही हुआ ने अब मान भी नी रिये है ये लोग “। पप्पू – “ नी यार रितिक अपने किसान भाई की सब बाते तो मान ली है अपने मामा ने “। रितिक- “तुम्हारे मामा, बताया नी भिया तुम्हारे मामा राजनीति मे है और तो ओर भिया अभी सरकार मे भी है “। पप्पू- “ अबे गेलिये मे अपने मुख्यमंत्री की बात कर रिया हू “।रितिक-  “अच्छा ,शिवराज मामा की के रिये हो “ । पप्पू- “ हा यार पर मेरे को लगता है के अपन सब भी तो किसान है , आज किसान भियाओ ने आंदोलन किया ने फिर उनका कर्ज़ माफ हुआ और फिर सब ठीक हो ही जायेगा “।
रितिक-  “  भिया बात तो सही है , पर एक बात बताऊ ये तुम किसान कब से बन गिये , कही वो फेसबूक पर फार्मविले को तुम असली खेती तो नी समझ रिये हो “। पप्पू – “ अबे नी रे , मैं के रिया हू के इस देश मे बाकी लोग भी काम कर रहे है और सबके पास इतना पैसा भी नही है फिर वो तो कभी ऐसा आंदोलन नी करते , मैं किसान भियाओ की तकलीफ समझ रिया हू ,पर अगर ऐसे ही सब करने लगे तो देश कैसे चलेगा “।

“ फिर क्या है के इस आंदोलन मे किसान भियाओ ने कम लफंदरो ने ज्यादा उत्पात मचाया है , दुध सडक पर फेक देना , सब्जिया फेकना ये कैसा आंदोलन है “। रितिक- “ भिया बात तो तुमने गेरी के दी  है  और बात सही भी है भारत मे जब जिसको विरोध करना होता है बस लग जाते है दुकान बंद कराने, इस चक्कर मे साल मैं  30 दिन तो ऐसे ही पोहे नी खाने को मिलते है “। “चलो भिया अपन चलते है पोहे खाते है , बाकी अपने मामा देख लेंगे “। पप्पू-“हा यार चल चले नी तो दुकान मे पोहे खत्म हो जायेंगे “।

 

पप्पू और रितिक जाते है पोहे खाने, वहा टीम इंडिया की फाइनल मे हार और विराट , अनिल कुबंले के बीच विवाद की बाते हो रही थी ।
दोनो को आते देख कालू ने कहा – “ भिया आओ और बताओ क्या लोगे “। पप्पू- “  अबे पोहे और जलेबी ही मिल रिये है तो वो हीच लेंगे “। कालू- “ यार भिया बहुत टेंशन है यार, वो इंडिया फाइनल हार गी ने उपर से जम्बो ने कोच की पोजिशन से रिजाईन कर दिया “। रितिक –“  अबे किया नही करवाया है रिजाईन “। कालू- “क्या बात कर रिया है , किसने की उसे रिजाईन करने की “। रितिक- “अबे वो हीच दिल्ली का लोंडा है नी कोहली उसने की “। कालू- “ क्या बात कर रिया है यार , मतलब इतना बडा हो गिया वो , पप्पू भिया ने हमे कितना कुछ सिखाया अपन सब को रोज़ के 2-4 रेपट भी लगा देते है पर अपन कहा बुरा मानते है “।
पप्पू- “ देखो यार अब अपना तो काम है तुम सबको आगे बढाना अब इसमे डाटना तो पडता है नी , अब कोहली को क्या है उसकी कोई गलती नी है मेरे को लगे ये सब उस छोरी के चक्कर मे हो रिया है “। कालू- “  पप्पू भिया ये गलत है , उस छोरी की क्या गलती “ पप्पू-“ अबे जम्बो भिया खूब मेहनत कराते थे और फिर कोहली के कने उस छोरी के लिये टाईम नी रेता होगा , बस इसी चक्कर मे हुआ है ये सब “। कालू- “नी भिया उस छोरी को तो क्रिकेट का कुछ पता नी है उसने नी किया होगा ऐसा “।
रितिक –“ तेरे पास  सबूत है “। कालू-  “अरे मेरी घरवाली के री थी  वो देखती है सब न्यूज़ चैनल “। रितिक- “ देखा पप्पू भिया, लुगाई के चक्कर मे आज आपको गलत के रिया है , बस इसी कारन कोहली ने जम्बो के बीच लडाई हुई थी “। कालू-“कुछ भी मत बोले रितिक , मेरी घरवाली गलत नी केती, पप्पू भिया कहा न्यूज़ देखते है इन्हे पता नी होगा “। रितिक-“ भिया आपको गलत के रिया है, मतलब आपको  गलत के रिया है यार, पप्पू भिया जिनने हमे पोहे मे सही साट जीरावन डालना सिखाया और फिर भुल गिया जब वो तू उस लड्की को लाईन मार रिया था , ने फिर तुझे उसके भाई धो रिये थे तो पप्पू भिया ने ही बचाया था तुझे “।

 

कालू- “ अरे ऐसा नी है और जीरावन तो कोई भी डाल ले सही से “।

 

पप्पू ने गुस्से मे कालू को देखा ने दे रेपट, दे रेपट ,दे रेपट और कहा – “ जाओ मैं भी अब कोच पोजिशन से रिजाईन देता हू “।  

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तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया

 

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