Sachin Tendulkar Centuries

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सचिन बस नाम ही काफी हैं –
भाग-2

आस्ट्रेलिया के विकटो पर तेज उछ्लती गेंदो का सामना करना ही हिम्मत का काम होता है और अगर मर्व ह्यूज और क्रेग मैकडेरमौट जैसे गेंदबाज जब गेंदबाजी कर रहे हो तो बैट्समेन  की हिम्मत मे कमी आना स्वाभाविक हैं | सर डॉन ब्रेडमैन की जमीन पर सचिन ने पहली बार कदम रखा था और आस्ट्रेलियाई दर्शको ने देखा एशिया का शेर जो विश्व क्रिकेट का नया डॉन बनने की राह पर चल पडा था|

वैसे तो अपने पहले  टेस्ट  शतक के बाद आस्ट्रेलिया के क्रिकेट के सबसे पुराने opposition ने उन्हे होशियार रहने  के लिये  कह दिया  होगा  और उन्होने  इसकी  तैय्यारी  भी  की होगी  ।

Third Test Between India and Australia at Sydney

2 जनवरी 1992 को भारत सीरिज का अपना तीसरा टेस्ट खेलने Sydney Cricket Ground पर पहुचा | पहले मैच मे भारत  को 10 विकेट और दुसरे  मैच  मे  8 विकेट से आस्ट्रेलिया  ने हरा  दिया  था |

भारत ने टास जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था| आस्ट्रेलिया की पहली पारी 313 रन पर समाप्त हुई| जिसमे डेविड बून के नाट आऊट 129 रन भी शामिल थे|

जवाब मे भारत के दो विकेट 79 पर गिर गये थे| उसके बाद वेंगसरकर और रवि शास्त्री ने 111 रन की साझेदारी करके स्कोर को 197 पर पहुचा दिया था| 197 रन पर वेंगसरकर शास्त्री का साथ छोड गये और चार रन बाद ही 201 पर अजहर भी पवैलियन लौट गये थे| अजहर के बाद सचिन क्रीज पर आये और शुरु हुआ बल्लेबाजी की किताब का एक नया अध्याय जो आस्ट्रेलियाई दर्शको ने पहली बार देखा था|



Sachin Tendulkar Centuries



युवा सचिन ने जिस तरह से ह्यूज और मैकडेरमौट का सामना किया वो तारीफ के काबिल था| उन्होने रवि शास्त्री के साथ मिलकर पाचवे विकेट के लिये 196 रन की साझेदारी करी थी| जब भारत का स्कोर 397 था तब शास्त्री शानदार 206 रन बनाकर शैन वार्न का पहला टेस्ट शिकार बने| जी हा ये वार्न का पहला टेस्ट मैच था|

पहली बार इस मैच मे सचिन और वार्न आमने सामने थे|भारत की पारी 483 रन पर समाप्त हुई| सचिन अंत तक आऊट नही हुये और शानदार 148 रन बनाये| जिसमे उन्होने 14 बार गेंद को सीमारेखा के पार पहुचाया| इस शतक के साथ वो आस्ट्रेलिया मे शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाडी बन गये थे| उन्होने 298 मिनिट बल्लेबाजी करी थी|

आस्ट्रेलिया ने दुसरी पारी मे 173 रन बनाये 8 विकेट खोकर और मैच ड्रा हो गया|

सचिन की इस पारी पर आस्ट्रेलिया के शानदार तेज गेंदबाज मर्व ह्यूज ने एलन बार्डर से कहा था “ ये लडका तुमसे भी ज्यादा रन बनायेगा|”

इस पारी से उन्होने अपनी प्रतिभा और क्षमता को साबित करा था|

अगली कडी मे पढिये कैसे सचिन ने दुनिया की सबसे तेज पिच पर दिखाया अपना जलवा|

Sachin Tendulkar first century | सचिन बस नाम ही काफी हैं -1

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India Tour Of Australia 2018

 India Tour of Australia 2018 First Test at Adelaide from 6-10 December 2018.

 

हर खेल मे जितने महत्वपूर्ण  खिलाडी  होते है उतने ही जरुरी उन्हे मैदान और उसके बाहर स्पोर्ट करने वाले दर्शक होते है । खिलाडी फिल्ड पर खेल खेलता है और वही खेल हर दर्शक के दिमाग मे भी चलता रहता है ।  कमेंटटॅर कह्ते है “  ohh it’s a loose ball outside the offstump” तो दर्शक अपने ही तरह से बात कहते है –  “अरे यार देख के तो डाल भाई” , “  मैंने तो पहले ही कहा था इसे मत रखो “ । 

इसके साथ ही जब जरुरत  होती तो टीम के साथ खडे होने की तो घर पर बैठे हुये ही कहते है- “  चलो- चलो  लडको  आराम से जीत रहे है ,सिंगल्स लेते रहो “ । मैं भी उन्ही दर्शको मे से एक हू, क्रिकेट का बहुत  बडा पंखा और टीम इंडिया का सबसे बडा सर्मथक ।  वैसे मैं टीम का आलोचक  भी हू और मेरा मानना है के जब आप  किसी का साथ दे तो उसकी आलोचना भी करे ताकी वो ये जान पाये के वो कहा गलत है ।

दोस्त का दोस्त अपना दोस्त और दोस्त का दुश्मन अपना दुश्मन

ये बात हमने फिल्मो मे काफी सुनी है । फिर इसे मैंने क्रिकेट मे अपना लिया , जब से क्रिकेट देखा तो कुछ याद रहा या ना रहा पर एक बात जरुर याद रही के पाकिस्तान से हार बर्दाश्त नही होगी । चाहे वो 96 वर्ल्ड कप का QUARTER FINAL हो या सहारा कप या फिर अनिल भाई के दिल्ली के टेस्ट मैच के 10 विकेट ।  हर बार टीम इंडिया  की इन जीत मे मैंने वैसा ही रिएक्ट किया जैसे बस ये लम्हा यही थम जाये और जिंदगी भर इन मैचेस की Highlights टीवी पर आती रहे । उस वक्त मोबाईल तो था नही पर अब मैं कई बार इन मैचेस हो  YouTube पर देखता रहता हू।  

हाल तो ये रह्ता था के हम दोस्त स्कूल या गली मे जब भी मिलते  एक बार Henry Olonga  की तारीफ कर लेते पर पाकिस्तान के किसी प्लेयर की तारीफ नही करते फिर चाहे वो Saeed Anwar ही क्यो ना हो ।  फिर रही सही कसर जेपी. दत्ता की  फिल्म Border ने कर दी ।

कारगिल युद्ध  के बाद स्कूल मे एक वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई और मैंने उसमे जो बाते की वो मैं ऐसे कर रहा था जैसे सामने पाकिस्तानी सेना के टैंक हो और मैं Border का सनी देओल ।

फिर आया 2003

क्रिकेट  मे 2003 को कोई याद रखे ना पर मेरे पास इस साल की बहुत यादे है । सचिन का शोएब को मारा अपर कट, नेहराजी के छ: विकेट और फाईनल मे जहीर खान की वो वाईड गेंद । हर वर्ल्ड- कप की तरह इसमे भी हमने पाकिस्तान को हराया था ।  पूरा भारत ये मानता था के चाहे वर्ल्ड कप हार जाओ पर पाकिस्तान  से मत हारना ।  पर जब टीम इंडिया 2003 वर्ल्ड-कप के फाईनल मे हारी तो ऐसा लगा के ये आस्ट्रेलिया से बदला लेना होगा।

India Tour Of Australia 2018

 2003 के  टीम इंडिया के  आस्ट्रेलिया दौरे की शुरुवात  मे तो ऐसा लगा नही पर फिर जब अजित अगरकर ने एक सेशन मे छ:  विकेट लिये और वीरू ने शाम को ही आधे रन बना दिये , लगा के रौंद दो इनको यही । ये वो टेस्ट मैच है जिससे हम दर्शको के दिल मे जो जगह पाकिस्तान ने ली थी , आस्ट्रेलिया उसके काफी करीब आ गया था  । MonkeyGate  ने ये जगह फिर और पक्की कर दी थी।

अब दोस्तो मे ये बाते कम होती है के पाकिस्तान कैसे उस टीम से जीता , अब तो हर वो टीम जो आस्ट्रेलिया को हरा देती है वो हमारी खास हो जाती है । चाहे वो पाकिस्तान की टीम हो । 

2003 से अब तक जो भी आस्ट्रेलिया दौरा रहा हो, दिल करता है इनको इनके घर मे हराओ । ऐसे हराओ के चाहे ये कितना भी आगे बढ जाये वो हार इनको हमेशा पीछे धकेले । 2003 मे  Adelaide Test मे राहुल द्रविड का वो आखरी रन के लिये Square Cut हो , पर्थ मे आर.पी का वो बोल्ड या भज्जी का वो पोंटिंग को आऊट करके गुलाटिया खाना हो , ये सब Golden Moments की तरह दिल मे छ्प गये है  ।

आज से टीम इंडिया का आस्ट्रेलिया दौरा शुरु हो रहा है ।  वो वीरु के 195 रन , सचिन के  Sydney Test के 200  और  इशांत शर्मा  की वो “ एक और करेगा “  वाला स्पेल  की तरह इस बार Golden Moments एक से ज्यादा हो और हम सीरिज जीत कर वापस आये ।

Bhuvneshwar Kumar Said :Sachin को out करना हमेशा याद रहेगा: भुवनेश्वर कुमार

 

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Arjun Tendulkar U19 Debut | अर्जुन से तेंडुलकर तक का सफर अभी बाकी है

मैं उस वक्त 12  साल का था और मुझे आज भी याद है। वो मेरी जिंदगी का पहला क्रिकेट वर्ल्ड-कप था। 1996 मे मैं पहली बार कोई क्रिकेट वर्ल्ड-कप देख रहा था। अगर मैं इसे अपने क्रिकेट की दुनिया की शुरुवात कहू तो गलत नही होगा। ये वर्ल्ड-कप भारत मे ही हो रहा था इसिलिये आजतक जो मैदानो के बारे मे सुना था उन्हे टीवी पर ही सही देखने का मज़ा अलग ही था। ये वर्ल्ड-कप इसलिये भी खास था क्योंकि इसमे सचिन तेंडुलकर भी खेल रहा था। मेरी तरह ये उसका भी पहला वर्ल्ड-कप था। इस वर्ल्ड-कप  के 15 साल बाद जब 2011 मे भारत ने वर्ल्ड-कप  जीता तो सचिन के संग मेरा भी सपना पूरा हुआ।

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अब अगला वर्ल्ड-कप 2019 मे और उसके बाद 2023 मे और शायद ये वो वर्ल्ड-कप हो जब अर्जुन तेंडुलकर अपना पहला वर्ल्ड –कप  खेल ले। उस वक्त शायद कोई ना कोई बच्चा जरुर होगा जो उसी उत्साह से अपना पहला वर्ल्ड-कप  देखेगा। परंतु क्या उस वक्त फिर से वो दिल मे वही उम्मीद रख पायेगा जो मैंने 96 मे सचिन से रखी थी।

वैसे अर्जुन ने क्रिकेट  मे शुरुवात तो कर दी है। सचिन की तरह मुझे वो जादुई लेग और आफ स्पिन तो नही दिखी उसकी गेंदबाजी मे परंतु एक स्पार्क  जरुर  था ।  वैसे अर्जुन ने सचिन का एक सपना तो पूरा किया है और वो है तेज़ गेंदबाजी करने का ,सचिन शुरुवात मे एम.आर.एफ  अकेदमी गये थे। तेज़ गेंदबाज बनने पर उन्हे बैटिंग करने की ही सलाह मिली। अर्जुन वैसे जब सुबह उठ कर ग्राऊंड की तरफ जाते होंगे तो ना उन्हे जल्दी उठकर बस पकड्नी होती होगी ना सिर्फ एक वडापाव से काम चलाना पडता होगा। और अक्सर ऐसा होता है के जब सुविधाये तो फिर इंसपायर होने मे या ये कही आग लगने मे टाईम लगता है।

सदियो से भारत मे बाप के काम को बेटो ने अपना के आगे बढाया है और अर्जुन उसी राहपर है। अर्जुन के पास सचिन से सिखने को बहुत है पर वो कहते है के ना जब घर मे कोई पढाने वाला हो फिर भी बाहर ट्यूशन वाले मारसाब से ही सही समझ आता है। वैसे सचिन की एक बात  “प्ले इच बाल आन मेरिट” अर्जुन को  माननी चाहिये इससे उस पर दबाव हमेशा कम होता होगा।

अर्जुन का जन्म 24 सितबंर 1999 को हुआ और तब तक उन पर वो दबाव आ चुका  था  के वो सचिन तेंडुलकर के बेटे है। सचिन ने शायद नही कहा हो पर दुनिया के रायचंदो ने उसी दिन कह दिया था के आ गया एक ओर सचिन। मुझे लगता है ऐसा ही रायचंदो ने तब भी कहा होगा जब अभिषेक बच्चन का जन्म हुआ होगा और आगे  क्या  हुआ आप सब जानते है। आधे से ज्यादा टेलेंट तो ये रायचंदो ने खराब कर दिया है। वैसे हाल ही मे अर्जुन ने भारत की U-19 टीम के साथ डेब्यू किया था।  वहा उनका प्रदर्शन ठीक ही रहा था। पान की किसी दुकान पर बैठे एक रायचंद ने उसके बाद कहा –“  नी इसमे सचिन वाली बात नी है ,इसको कोई दुसरा धंधा  देख लेना चाहिये”।  वैसे इसी रायचंद ने इस टूर के पहले कहा था –“ कल से देख लेना दुसरा तेंडुलकर आ रिया है” । सबसे निराली बात ये है के ये मैचेस टीवी पर देखे नही । अर्जुन को ऐसे लोग बहुत मिलेंगे अब ये तो उस पर डिपेंड करता है के वो कैसे अपने करियर को आगे  ले जाता है।

U-19 टीम के कोच द्रविड के साथ अब अर्जुन किस राह पर जायेंगे  ये तो वक्त बतायेंगा परंतु ये सितारा रोहन गवास्कर ना  बने  इसकी हम दुआ  कर सकते है।

 

 

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Bhuvneshwar Kumar Said :Sachin को out करना हमेशा याद रहेगा: भुवनेश्वर कुमार

सचिन तेंडूलकर को आऊट करने का सपना तो हर गेंदबाज़ देखता हैं पर उन्हे जीरो पर आउट करने का आइडिया हर गेंदबाज के मन मे नही आता है. कुछ ही ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होने यह अब तक यह कारनामा किया है. उन्ही मे से एक हैं भुवनेश्वर कुमार. उत्तर प्रदेश के इस मध्यम गति के स्विंग गेंदबाज़ ने 2008 के रणजी फाईनल मे सचिन को शून्य पर आउट करा था. सचिन पहली बार घरेलू क्रिकेट मे शून्य पर आऊट हुये थे.
  
एक बार ब्रैड हाग ने सचिन को आउट करने के बाद सचिन से गेंद पर आटोग्राफ मांगा था. सचिन ने गेंद पर लिखा दिया था” this will never happen again (ये अब कभी नही होगा) और आज तक वो फिर से सचिन का विकेट नही ले पाये हैं. क्या आपकी बात हुई उसके बाद सचिन से कभी इस बारे मे?
हर क्रिकेटर की तरह मैंने भी काफी लंबे समय से सचिन के साथ खेलने का सपना संजो रखा था. यह चाहे फिर उनके खिलाफ ही क्यो ना खेलना हो. उस मैच में सचिन आउट हो कर पवेलियन चले गए थे. मैं बाद में उनसे मिलने पहुचा था पर मुलाकात नहीं हो पाई. उसके बाद से कोई मौका ही नही आ पाया कि सचिन से बात हो पाती. और शायद आऊट होना तो किसी भी बल्लेबाज़ को अच्छा नही लगता हैं.
जब आप सचिन को गेंद करने जा रहे थे तो सीनियर खिलाड़ियों ने क्या कहा और आपके दिमाग मे क्या चल रहा था?
मैंने सिर्फ इतना सोचा था के मैं अपनी स्ट्रेंथ पर गेंद करुंगा. सीनियर खिलाडियों ने मेरा उस वक्त काफी हौसला बढाया था. इससे मुझे काफी मदद भी मिली थी.
प्रवीण कुमार आर.पी.सिंह आपके ही स्टेट यूपी से हैं. इनसे क्या सीखने को मिलता हैं?
काफी सिखने को मिलता हैं, किस तरह से आगे बढ़ना हैं. गेंदबाजी मे क्या सुधार करना हैं. इंटरनेशनल लेवल पर किस तरह से गेंदबाजी करनी चाहिये और वहां पहुचने के लिये तैयारी कैसे की जाए, ये सारी बातें हमें सीनियर प्लेयर्स ही बताते हैं.
भारत की पिचों पर तेज गेंदबाजो को मदद कम मिलती हैं और जहां तक स्विंग की बात करे तो वो भी यहां काफी मुश्किल है. इस स्थिति मे आप अपने आप को मोटिवेट कैसे करते हो?
हां कई बार होता हैं जब पिच से कोई मदद नही मिलती हैं. उस वक्त बस विकेट टू विकेट गेंदबाजी करना होता हैं और जैसा मैंने कहा के सीनियर प्लेयर्स काफी मदद करते हैं तो ऐसे मौकों पर उनकी टिप्स हमेशा काफी काम आती हैं.
आई.पी.एल मे आपने कई इंटरनेशल प्लेयर्स को बालिंग कराई थी. उन्हे गेंदबाजी करने में और घरेलू खिलाडीयो को गेंदबाजी करने में आप क्या अन्तर महसूस करते हैं. क्या ऐसा भी कोई समय आया कि आप को लगा कि इस बल्लेबाज को बाल कराना काफी मुश्किल है.  
इंटरनेशनल प्लेयर्स के पास अनुभव काफी ज्यादा होता हैं. साथ ही उन्हे गेंदबाजी करना एक अच्छी लर्निंग होती है. लेवल का डिफरेंस भी था वहां पर और जहां तक मुश्किल की बात हैं तो ऐसा कभी नहीं लगा. आप किसी भी बल्लेबाज को आउट कर सकते हो, बस आपको अच्छी गेंदबाजी करनी होती हैं. वहां पर सिर्फ आपकी गेंदबाजी मैटर करती हैं.
ईडन गार्डेन पर आपने अपना पहला घरेलू मैच खेला था. कैसा अनुभव रहा आपका वहां खेलने का.
ईडन गार्डेन पर खेलना कई भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों का सपना रहता हैं. मेरा भी सपना था क्यूंकि ईडन गार्डेन मेरा फैवरेट मैदान भी हैं. मैंने उस मैच मे अच्छा प्रदर्शन किया था. पहली पारी मे 3 विकेट लिये थे और इसलिये मैं इसे अपना लकी ग्राउंड मानता हूं.
जिस तरह उमेश यादव और ऐरोन के पास स्पीड है. क्या एक तेज गेंदबाज के लिये स्पीड स्विंग से ज्यादा मायने रखती हैं ?
नही ऐसा नही हैं, हर गेंदबाज का गेंदबाजी करने का स्टाईल होता हैं. उमेश और ऐरोन स्पीड से गेंदबाजी करते हैं. मेरे लिये स्विंग काफी मैटर करता है. सब कुछ इस बात पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से गेंदबाजी करते हैं और आपकी स्ट्रेंथ क्या है.
 
आप एक अच्छे बल्लेबाज हैं. घरेलू मैचों में आपने छ: अर्धशतक लगाये हैं. क्या आपको लगता है कि आपकी बल्लेबाजी आपके भारतीय टीम मे चयन मे मददगार रहेगी?
मै एक आलराऊंडर के तौर पर टीम मे खेलता हूं. जब आप गेंदबाजी मे अच्छा करते हो तो वो बल्लेबाजी मे फायदा मिलता हैं और जब आप बल्लेबाजी मे अच्छा करते हो तो गेंदबाजी मे आत्मविश्वास बढता हैं. अब तक के करियर मे मेरे लिये ये काफी फायदेमंद रहा हैं
आपको कब लगा कि आपको क्रिकेटर ही बनना है?
 
बचपन से शौक था क्रिकेट खेलने का, उस वक्त क्रिकेटर बनने के बारे में कभी नहीं सोचा था. फिर जब अंडर-19 मे सेलेक्शन हुआ और वहां अच्छा खेला तो लगा कि मैं क्रिकेटर बन सकता हूं.
गेंदबाजी और बल्लेबाजी मे आपका आईडियल कौन हैं?
आईडियल जैसा कुछ हैं नही पर बचपन से प्रवीण कुमार के साथ खेला हूं. हमेशा उनसे ही सिखा हैं. जब भी परेशानी आती हैं उनसे ही बात करता हूं. उनका और मेरा गेंदबाजी का अंदाज भी एक जैसा हैं.
बल्लेबाजी मे मेरा नेचुरल अंदाज हैं. कभी आईडियल नही माना किसी को, बस सचिन की बल्लेबाजी काफी पसंद आती हैं.
कितनी जल्दी अपने आप को भारतीय टीम मे देखना चाहेंगे?
 
हर कोई जो भारत मे क्रिकेट खेलता हैं वो भारतीय टीम मे खेलना चाहता हैं. जल्दी या देरी जैसी कोई बात नहीं है. बस अपना अच्छा प्रदर्शन करना हैं. बाकी चयनकर्ताओ पर निर्भर करता हैं. 
यहा तक पहुचने का श्रेय किसे देंगे?
यहां तक पहुचने का श्रेय मैं अपने माता पिता और दीदी को देना चाहता हूं. जब पहली बार स्टेडियम मे गया था तब मै काफी छोटा था. तब मेरी दीदी मुझे खेलने ले गई थी. ये ऐसा लम्हा हैं जो हमेशा मुझे याद रहेगा. साथ ही मेरे कोच विपिन और संजय रस्तोगी को भी मे इसका श्रेय देना चाहूंगा उन्होने जो भी मुझे सिखाया हैं. उसी की बदौलत यहाँ तक पहुचा हूं.
नये खिलाड़ियों के लिये आपके सुझाव.
क्रिकेट एक ऐसा खेल हैं जिसमे काफी उतार चढाव आते हैं. तो इतना कहना चाहूंगा कि आप अपना फोकस हमेशा खेल पर ही रखें और अपनी ओर से मेहनत करना बन्द न करें.
आप अपना खाली वक्त किस तरह बिताते हैं?
गाने सुनता हूऔर दोस्तों के साथ घूमता हूं.
आपका पसंदीदा सिंगर कौन हैं.
सोनू निगम के गाने मुझे काफी अच्छे लगते हैं. उनके एलबम का गाना चंदा की डोली”मुझे काफी पसंद हैं.
अब तक का यादगार पल
सचिन को आऊट करना अब तक का सबसे यादगार पल रहा हैं. उस मैच मे 5 विकेट भी लिये थे साथ मे 80 रन भी बनाये थे तो वो मैच मुझे अब तक याद हैं.

 

ये इंटरविव मैंने 2011 मे दखलंदाजी की ओर से लिया था ।

 

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