तिरभिन्नाट पोहा- इंडिया व्र्सेज आस्ट्रेलिया

 “यार उमेश बोत दिन हुये ये पप्पू भिया नी दिख रे है “ –रितिक ने कहा । “ हा यार मैं भी काम के चक्कर मे उधर जा नी पा रिया हू ने फिर शाम को पानी आ जाता है नी तो फिर अपन कहा पप्पू भिया को ढूढो “ –उमेश ने कहा । रितिक –“ क्यो रे गेलिये पानी का पप्पू भिया से क्या लेना देना “ । उमेश-“ अरे यार पिछले साल बारिश गिरे ने के पप्पू भिया का फोन आये , ने फिर मेरे से के चल चले अड्डे पे “। रितिक –“ अबे तो दारू हीच तो पीने का के रिये थे कौन सा तेरे को तीर्थ करवा रिये थे “। उमेश-“  अबे नी यार , तू समझियो कौणी , पप्पू भिया शुरु के 2-4 पैक तो ऐसे पीये जैसे कोई मैजिक सिगनल खुलते ही दौडे ,ने फिर उने चढ जाये ने फेर अपणा नी पीन दे, बार –बार दे लप्पड- दे लप्पड ने के दारू पीना बूरी बात है “। रितिक ने दूर से पप्पू भिया को आते देखा और कहा –“अरे नी यार अपने पप्पू भिया ऐसे नी है वो तो सज्जन आदमी है , पीयो और पीने दो मे विसवास रखते है रे “। पप्पू भिया उमेश के पीछे आकर खडे हुये और रितिक को चुप रेने का इशारा किया । उमेश –“अबे गेलिये तेरे को सज्जन दिखते है , तू और पप्पू भिया दोनो ही सर्किट हो “। ये कहते हुये उमेश पलटा और पप्पू भिया को देख के जो उसकी आवाज़ अब तक न्यूज़ रिपोर्टर की तरह फर्राटे से चल री थी वो एक नर्वस इंटरविव देने वाले सरीकी हो गई । उमेश-“  अरे भिया मैं तो के रिया था के पप्पू भिया हमारी बिमारी , हमारा दर्द अपने पास रख लेते है , जैसे भगवान भोलेनाथ ने विष पिया था वैसे ही ये हमे बचाने के लिये दारू पी लेते है “। पप्पू भिया ने ये सुनते ही दो लप्पड उमेश को लगाये और कहा –“ गेलिये भोलेनाथ का मज़ाक उडाता है “।

रितिक –“अरे भिया इसे छोडो ने ये बताओ कहा थे इत्ते दिन , ने वो मैच है यार कल ने कोई टिकीट की जुगाड नी हुई भिया “। पप्पू भिया-“ अरे रितिक , इसीज़ काम से तो गिया था मैं “। उमेश –“भिया इतना टेम तो शादी के कारड प्रिंट करवाने मे नी लगता उससे ज्यादा तुम्हे मैच के टिकीट प्रिंट करवाने मे लग गिया, क्या हाथ से पैंट कर रिये थे क्या “। पप्पू भिया को फिर गुस्सा आ गिया और दे लप्पड –दे लप्पड उमेश को । पप्पू भिया – “ अबे नी बे बारिश एक तो अपने इधर होई नी तो पेले मे रिशीकेश के जंगल मे गया ने वहा अभी सिहस्थ मे दो चार बाबाओ से अपनी जो भेट हुई उनसे मिला ने बारिश का उपाय पूछा । फिर जो उपाय बताया तो किया अपन ने उपाय दो दिन बाद मैंने पेपर मे पढा के इंदौर मे जोरदार बारिश हुई । पर अपन क्या थोडा ज्यादा मे विसवास रखते है तो अपन ने उपाय मे सामग्री ज्यादा डाल दी जैसे अपन जीरावन ने सेव डालते है नी वैसे , इसिलिये तो बारिश अब तक हो री थी । “


रितिक- “ वा भिया तुम तो बहुत पोचे हुये निकले पर फिर  बारिश तो रुक गी थी और फिर भी तुम काफी दिन मे आये , वही रुक गे थे क्या भिया “। पप्पू भिया –“ नी बे , वो वापसी मे आ रिया था वो  रवी का फोन आया ने किया के यार मैच है तुम्हारे यहा ने पानी गिर रिया है और बोले के अपन सोच रे है पेले तीन जीत के सिरीज़ जीत ले तो फिर नये छोरो को चानस देंगे । अब अपना दिमाग फिरा अपन ने फिर उस बाबा को जैसे तैसे ढूंढा ने बारिश को भारत मे दुसरी जगह करवाने का उपाय किया और फिर रुका पानी “। उमेश- “भिया मान गये , तुम्हारे पैर कहा है , छूना है “। पप्पू भिया- “रेनदे , सैंडविच पर घी मत लगा “। रितिक- “ भिया वो सब ठीक है पर ये रवि कौन है और कौनसे मैच की के रिया था , कही वो अपना मरीमाता वाला तो नी “। पप्पू भिया – “नी रे ऐबले , मैं रवि शास्त्री की के रिया हू , भारत की क्रिकेट टीम का कोच “। उमेश – “तो भिया तुम फिर तो रेडिसन गये होंगे कल “। पप्पू भिया – “ हओ रे , ऐयरपोर्ट से रेडिसन के बोत चक्कर लगे ने उसके पेले अपन राजबाडे मे बरसाती वाले के यहा गिये ने उसको आर्डर दिया ने बास वाले से बास और चार छोरे लेके ,स्टेडियम के उपर बांध दी बरसाती ने उसकी रस्सी अपांयर को दे देंगे, जैसे आजादी वाले दिन झंडा फेराते है नी बस वैसे ही पानी आते ही अपांयर रस्सी खेंच देंगे ने बरसाती से पूरा स्टेडियम ढंक जायेंगा ।“  रितिक –“ गजब भिया, तुम या क्या कर रे हो तुमे तो मतलब साईटिस होना था “। पप्पू भिया- “अबे अब समाज सेवा कौन करेगा अगर मै साईटिस बन जाऊ तो “। उमेश –“ भिया पिलेयर से मुलाकात हुई के नी किसी से “। पप्पू भिया-  “अबे क्या के अब, सबके अपने स्टाईल का खाना  धोनी भिया के लिये सुबह चार बजे उठ के ने वो पाटीदार से 6 लीटर दूध लाया,कोहली भिया को ना जाने कौनसी मछ्ली चिये थी ने पिछली बार उनने इस चक्कर मे पोहे नी खाये तो फिर मछली बज़ार जाके ने मछली लाये ने वो मछली भी उज्जैन के एक तालाब मे मिली बताओ अब । ने फिर कुछ पिलेयर तो अपने सज्जन है जैसे रहाणे उसको खजराना जाना था उसको अपन ने वहा पोचा दिया ने बढिया पूजा करवा दी । अब एक वो पांड्या , अजब स्टाईल कर रखी है उसने मैंने रवि भिया से की थी के यार इसको सही करवा दो कही पुलिस परदेशीपुरा का समझ के धर नी ले पर नी माना,निकल गिया अकेले बजार मे ,अब अपने यहा की पुलिस बोत स्ट्रिक्ट है ।तो धर लिया फिर वा जाके उसे छुडाया । “ उमेश –“ भिया  भिया भिया” । पप्पू भिया-“ हा यार उमेश अब क्या करे करना पडता है अच्छा कल मैच के बाद रात को दो बजे सराफा आ जाना उधर अपन ने  एक पार्टी रखी है दोनो टीम के पिलेयर आयेंगे ने जम के करेंगे नाश्ता , वो आस्ट्रेलिया वाले तो मान गे फिर विराट भिया को भी समझाया के फिटनेस ठीक है पर कभी- कभी चलता है ने फिर अपने इंदौर का स्वाद भी गजब है और आखिर मे अपन ने रामबाण फेका और अनुष्का भाभी से केलवा दिया फिर तो मानना ही था , क्यो है ना रितिक और उमेश “।

रितिक और उमेश पप्पू भिया को दंडवत प्रणाम कर रे थे ।

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तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन

तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप

कुछ दिन तो बिताओ दादा-दादी और नाना-नानी के घर

इस दुनिया मे जब हम आते है । कई सारे रिश्तो से जुड जाते है । इन्ही सब रिश्तो मे एक रिश्ता होता है । दादा-दादी और नाना-नानी का और अगर सच कहू तो ये एक ऐसा रिश्ता है जहा शायद हमे सबसे ज्यादा प्यार मिलता है । चाहे आप इस दुनिया के छुट्टीया मनाने कही भी चले जाये परंतु गर्मियो की छुट्टीयो मे दादा-दादी और नाना-नानी के घर जाना सबसे बेहतर समर होलिडे होगा । हर कोई अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ समय बिताना चाहता है ।

जब हम छोटे थे तब शायद इतना हम ये नही सोचते के हम अपने माता-पिता के माता-पिता के साथ समय कैसे बिताना चाहते है । फिर जब नौकरी लगती है और ज्यादा वक्त जीवन की आप-धापी मे जाता रहा  । तब इस बात के बारे मे सोचते है के अगर मौका मिले या ये कहे के काश छुट्टीया मिले तो कुछ वक्त उनके साथ गुज़ारे ।

एक दिन दादाजी-दादीजी के साथ

दादाजी-दादीजी के संग वक्त गुजारने का अपना ही मज़ा है । उस वक्त हमे जो किस्से कहानिया सुनने को मिलते है । वो शायद ही कही और सुनने को मिले । मैं अपने दादाजी के साथ अपने गाव “कैथूली” जाना चाहता हू । वहा जाकर उनके संग उन गलियो मे घुमना चाहता हू । जहा उन्होने अपने जीवन के कई साल बिताये है । दादाजी के खेत पर जाकर उनसे वहा  उगने वाली फसलो के बारे मे जानना चाहता हू । खेत मे पानी कैसे देते है और साथ ही कैसे आखिर पुराने वक्त मे यहा खेती हुआ करती है सब जानना चाहता हू । फिर उसके बाद हम कैथूली के ही पुराने मंदिर मे बैठेंगे और उस वक्त मुझे दादाजी गाव के कई लोगो से मिलवायेंगे । आप माने या ना माने जितने खुशी से गाव के लोग किसी से मिलते है जो आदर सत्कार वो लोग करते है । वो हम शहर वालो के लिये काफी मुश्किल है । दादाजी के संग दिन का वक्त बिताने के बाद फिर जब हम घर जाये तो दादीजी के हाथ के बने घी के पराठे और बेसन का स्वाद दुनिया के किसी भी होटल से बेहतर होगा । खाने के बाद फिर घर मे जो पेड लगा है उसकी छाव मे एक प्यारी सी नींद लेने का मज़ा भी बहुत आयेगा । गाव मे अक्सर जब भी कोई मेहमान आता है तो उसे आस-पडोस वाले अपने घर पर जरूर बुलाते है । दिन की इस नींद के बाद इसी का सिलसिला शुरु होगा । शाम के वक्त गाव की एक सैर और साथ ही चौपाल पर बैठकर दादाजी और बाकी बुजूर्गो की बाते और अनुभव इस दिन का अंत शानदार बना देंगा । रात मे ना तो पंखा ना ऐसी और ना बिस्तर की जरुरत लगेगी क्योंकी गोबर से लेप किये हुये फर्श की ठंडक इन सबसे बेहतर होगी । दादाजी तो अब इस दुनिया मे नही है परंतु मैं और दादीजी जब भी गाव जायेंगे दादाजी हमारे साथ हमारे दिल मे वही होंगे ।
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एक दिन नानाजी-नानीजी के साथ

मेरे नानाजी और नानीजी दोनो ही शिक्षक थे । अब जब मैं शामगढ उनके घर जाता हू तो जो सुकून और चैन मिलता है  वो कही और ढूंढना मुश्किल है । नानाजी और नानीजी के दिन की शुरुवात सुबह 5 बजे से होती है । सुबह 6 और 8 बजे के समाचार नानाजी के रेडियो पर सुनना कई न्यूज़ चैनलो की न्यूज़ से बेहतर होता है । नानाजी के घर के सामने ही पोहे की दुकान है । 8.30 बजे जैसे ही वहा पोहे और समोसे तैय्यार होंगे । नानीजी किसी को भेजकर पोहे और समोसे मंगवा लेंगे । नानाजी एक लेखक भी है । पोहे और समोसे खाते खाते उनके साथ लेखन की बारिकी को सिखना और उनसे कहानिया सुनने मे बडा मज़ा आयेगा । नानीजी के हाथ का बना अचार दुनिया मे बने किसी भी सास और अचार से बेहतर होता है । खासकर नींबू का अचार । दिन के खाने मे वो अचार खाने का स्वाद 100 गुना बढा देता है । शाम के वक्त नानाजी रेलवे स्टेशन पर घुमने जाते है और साथ होता है उनका वही रेडियो जिस पर सिर्फ आधे घंटे मे आप सारी खबरे जान सकते हो । जिसे जानने के लिये आपको टीवी पर शायद घंटो लग जाये । नानाजी –नानीजी के साथ शाम का समय उनके अनुभव और पुराने किस्से सुनने मे बितेगा और रात को खाने के बाद छत पर बैठकर नानाजी कहानी सुनायेंगे । नानाजी काफी अच्छे कहानी वक्ता है ।

ये जो दो दिन मैं बिताऊंगा उन दो दिन मैं अपने संग मोबाईल नही रखुंगा और फिर भी मुझे लगेगा के दिन जल्दी बित गये ।

ये पोस्ट मैं अपने दादाजी-दादीजी और नानाजी-नानीजी को समर्पित करना चाहता हू ।

#LoveJatao
I look forward to hear from you how would you celebrate Grandparents Day.


I look forward to hear from you how would you celebrate Grandparents Day. Do share a selfie with your grandparents on Sept. 10, 2017 on Twitter or Facebook with #LoveJatao & tag @blogadda to win a goodie from Parachute Advansed