कुछ बातें

शब्दों के खेल में 

बातो के मेल में 

उलझते हैं दिल के सवाल कई 

 

शर्माती इठलाती हुई बातो में 

वो अनकही मुलाकातों में 

आँखों के इशारो में 

मिल जाते हैं मौसम कई 

 

छम-छम पायल की तेरी 

जुल्फों की छाव तेरी 

लबो से निकली वो बातें तेरी 

दे जाती हैं जवाब कई 

 

yaadein-memories

शाम तो रोज आती हैं 

लेकर चंदा को साथ अपने 

हवा भी चली आती हैं 

लेकर ख्याल कई 

 

जाम तो रोज रात में 

हाथ में होता हैं 

नशा चाहे हो न हो 

आईने में जब देखता हूँ 

तस्वीर अपनी  

तेरी चूडियो की खनक 

दिखाई देती हैं 

 (चिराग )

काश वापस आ जाये

काश वो दिन फिर आ जाये

पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 

नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 

काश वो दिन फिर आ जाये 

 

काश वो रबर फिर घूम जाये 

टिफिन काश वो फिर घर से 

लंच टाइम में पापा देने आये 

गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 

वापस आ जाये 

 

childhood-days

एनुअल फंक्शन का वो डांस 

वो नाटक की तयारी 

वो साइकिल की यारी 

काश वापस आ जाये 

 

वो साइकिल का पंचर होना 

वो कम्पास में से पेन चोरी होना 

वो ड्राइंग का  पीरियड

वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद

वो बुक से क्रिकेट खेलना 

काश वापस आ जाये 

 

 

wwf  का वो खुमार 

कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 

वो होली का हुडदंग 

वो संक्रांति की पतंग 

हट …काटा ……हैं  की

वो आवाज़ 

 

काश वापस आ जाये

 

वो दिन वो बीते हुए लम्हे 

आज भी जेहन में हैं मेरे 

बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 

और यादो को ताज़ा कर जाये 

(C.J)

वो अंजाना चेहरा -4

the final meetingआखिरकार वो दिन आ ही गया जब अमित और कविता एक दुसरे से मिलाने वाले थे .कविता नीले रंग का सूट पहन कर जाने वाली थी ,और अमित सफ़ेद रंग की शर्ट और नीली जींस.

 

कविता सही समय पर शालीमार स्ट्रीट पहुच गयी ,जहाँ पर दोनों का मिलना तय हुआ था .उसे अमित का इन्तेजार करते हुए आधा घंटा हो गया था  उसने सोचा अमित को फ़ोन लगाया जाये  ,पर तभी उसके मोबाइल पर निधि का फ़ोन आया ,जैसे ही उसने कॉल उठाया उधर से निधि बोली “कविता ,सेव वन अस्पताल आ जा संजय …..”

 

जैसे ही कविता ने संजय और उस अस्पताल का नाम सुना उसके हाथ पाँव फुल गए ,उसने झट से कहा “आती हूँ “

और फ़ोन काट दिया  कविता काफी दर गई थी पहली बार उसे जिंदगी में प्यार हुआ और जब वो उससे मिलने वाली थी और ये हादसा  हो गया .

 

जैसे ही वो अस्पताल पहुची दौड़ते हुए  आई .सी .यू के पास पहुची गयी ,वहा उसने संजय को देखा तो उसकी जान में जान आई पर थोड़ी हैरत भी हुई उसने निधि से कहा “संजय तो ठीक हैं “

निधि “हां वो तो ठीक हैं तुने पूरी बात सुनी कहा थी ,संजय के भाई शिशिर का एक्सिडेंट हो गया हैं “

कविता संजय के पास गयी और उसे हिम्मत देने लगी .

 

तभी डॉक्टर आये और कहा के शिशिर खतरे से बाहर हैं ,हम उसे प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं ,एक घंटे बाद उसे होश आ जायेगा .

कविता ने संजय से पुछा ये कैसे हुआ 

संजय ने बताया किसी लड़की से मिलने जा रहा था ,जिससे कई दिनों से चेटिंग कर रहा था .

कविता ने सुना तो थोडा दरी पर संभल गई के हो सकता हो वो भी चेट कर रहा हो संजय की तरह .

 

एक घंटे बाद 

 

संजय ,कविता और निधि शिशिर के पास गए उसे होश आ गया था .

“कैसे हो शिशिर “कविता ने कहा 

शिशिर “ठीक हूँ “

 

कविता फिर ठिठकी क्योंकि उसे आवाज़ जानी पहचानी लगी .

तभी शिशिर के बेड के पास एक दिअरी पड़ी थी ,उसने उसे उठाया और पढना शुरू करा ,उसने शेर लिखे थे और वो वही शेर थे जो  अमित  उसे सुनाया करता था,उसके पैरो तले ज़मीन खिसक गई और वो रोते हुए कमरे से बहार चली गयी .

निधि और संजय उसके पीछे गए .

कविता ने संजय से पुछा “तुम्हारे भाई को कंप्यूटर चलते आता हैं “

संजय  “हा काफी अच्छे से वो कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर रहा हैं ,मेरे सारे कंप्यूटर के काम वही करता हैं ,जैसे अपने ट्रिप के फोटो कैमरे से कंप्यूटर में उसने ही डाले थे “

अब कविता को विश्वास हो गया के उसका अमित शिशिर ही हैं .

उसने संजय और निधि को पूरी बात बताई .

 

उसके बाद वो शिशिर से अकेले मिलने वार्ड में गई .

वहा पर उसकी सफ़ेद शर्ट थी जिस पर खून के दाग लगे थे ,उसे देखकर वो रोने लगी 

             तभी शिशिर ने कहा ” तुम हँसते हुए ज्यादा अच्छी लगती हो “,

कविता ने कहा ” तुमने झोत क्यों बोला “

 

शिशिर ” जब मैंने भय्या की ट्रिप की फोटो में तुम्हारी फोटो देखि तब से मैं तुमसे प्यार करने लगा ,भय्या से तुम्हारे बारे में पुछा तो उन्होंने कहा के बहुत चुप रहती हैं और कम बोलती हैं ,तभी मैंने भय्या से कहा के वो तुम्हे फेसबुक पर अकाउंट बनाने को कहे उससे तुम्हारे अन्दर बदलाव आ जायेगा और आगे तो तुम जानती हो क्या हुआ “

कविता के चेहरे पर मुस्कराहट थी ,उसे अंजाना चेहरा मिल गया था .

 

शिशिर ने कविता को गले लगा लिया और कहा  ” अब तुमसे कभी झूठ नहीं बोलूँगा “

 

(एक छोटी सी कोशिश थी मेरी ,ये मेरी तीसरी कहानी हैं “the day dream(जो जारी हैं और जल्द ही उसका अंतिम भाग आएगा ) और दूसरी “मुन्नी ” (इसे आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं ) उम्मीद करता हूँ कहानी आप सबको पसंद आएगी ,कही कोई त्रुटी हुई हो तो जरुर बताइयेगा ताकि अगली बार ध्यान रखूँगा )

 

                                                                         (चिराग)