वो अंजाना चेहरा -3

कविता और अमित के बीच बातचीत जारी  रही पर ना तो कभी कविता ने ना अमित ने प्यार का इज़हार करा ,

कविता एक दिन कॉलेज गई और अचानक उसकी मुलाकात संजय से हुई 

 

संजय ने  उसे हेलो कहा ,कविता ने कहा “संजय मुझे अपनी ट्रिप के फोटो चाहिए मुझे ,मैं फेसबुक पर डालूंगी “.

संजय ने कहा “मैं तुम्हे कल ला दूंगा ,तुमने बहुत ही अच्छा गाना गया था ,मैंने सुना हैं की तुम्हारा गला ख़राब हो गया था प्रतियोगिता से एक रात पहले”


“हा संजय ,पर एक दोस्त ने मुझे बचा लिया “

संजय “कोन दोस्त”

कविता ” हैं कोई “

संजय”मतलब तम्हारी जिंदगी में किसी खास ने प्रवेश करा हैं “

कविता ने फिर संजय को  बताया के वो अमित को कब से जानती हैं ,और वो उसे चाहने लगी हैं 

 

जब दोनों बात कर रहे थे तो अचानक एक बात पर संजय ने एक शेर कह डाला 

 

“खुश रहना तो खुदा की इबादत हैं 

मुस्कुरा के जीना उसकी चाहत हैं 

नादान हैं वो लोग जो करते हैं 

इन्तेजार  खुशियों का 

वो तो रब की तरह हमेशा हमारे पास हैं “

कविता शेर सुनकर एकदम स्तब्ध रह गई क्योंकि ये शेर उसे अमित ने सुनाया था ,

              उसने सोचा कही संजय ही तो अमित नहीं क्योंकि संजय ने ही उसे फेसबुक के बारे में बतलाया था 

girl and boy talking

कविता ने सोचा थोड़ी जांच पड़ताल करी जाये 

उसने निधि से पुछा संजय के बारे में ,तो निधि ने कहा “क्या बात हैं ,संजय के बारे में क्यों पुच रही हैं “

कविता ने कहा “अरे एसा कुछ नहीं हैं तू इतना बता के वो शायरी लिखता हैं क्या “

 

तभी निधि के मोबाइल पर एक एस .एम .एस  आया ,उसे देखकर निधि ने कहा “ये ले आ गया तेरे संजय का एस .एम .एस”

“मेरी हंसी पर ना जाओ दोस्तों 

ये तो पल भर की हस्ती हैं 

ये तो उस गम को छुपाने  के लिए हैं 

जो आजकल मेरी बस्ती हैं “


जैसे ही कविता ने मेसेज पढ़ा वो चौक गई क्योंकि ये शायरी भी उसे अमित ने सुनाई थी .

कविता ने निधि से कहा “मैं और एस .एम .एस पढ़ लू उसके “

निधि ने कहा “ठीक हैं “

जैसे जैसे कविता एस .एम .एस पढ़ रही थी उसके चेहरे की मुस्कान  बढ़ रही थी 

क्योंकि सारी  शायरिया अमित ने उसे सुनाई थी 

अब उसे पक्का यकीं था के संजय ही अमित हैं 

कविता ने निधि से कहा “ये संजय खुद लिखता हैं शायरी “

निधि ने कहा “हा हो सकता हैं क्योंकि मैंने और किसी से नहीं सुनी ऐसी शायरिया “

कविता “लेकिन मेरे पास क्यों नहीं हैं …… “निधि ने बात को बीच में ही काटते हुए कहा “तुझे एस .एम .एस का शोक कहा हैं इसीलिए नहीं भेजी होगी उसने तुझे “

 

कविता ने सोचा के अब संजय को सब बता दूँ ,पर फिर एक पर रुकी और  सोचा उसे surprise  दूंगी .

 

रात को जब अमित  उसे ऑनलाइन मिला ,उसने कविता को बताया के वो उसके शहर आ रहा हैं उससे मिलाने १० तारीख को (कविता समझ गई के अब अमित उर्फ़ संजय भी उससे मिलना चाहता हैं )

वो बहुत खुश थी .

आख़िरकार कविता को अपना अमित मिल ही गया 

कैसे दोनों का मिलन हुआ जानने के लिए पढ़िए इस कहानी का चौथा और अंतिम भाग .

 

वो अंजाना चेहरा -2

अब कविता का समय फेसबुक पर बिताने लगा ,कविता को गाने का काफी शोक था ,पर एस एम एस करने का बिलकुल नहीं शायद ये भी एक कारण था  के उसके एम.बी .ए  में दोस्त कम होने का ,

कविता  ने फेसबुक पर अपने सभी दोस्तों को जोड़ लिया था 

एक दिन उसके पास एक फ्रेंड request  आई नाम था अमित  कश्यप  

उसने उसे जोड़ लिया  ,वैसे कविता नए लोगो से दोस्ती नहीं करती थी जल्दी पर पता नहीं क्यों इस अमित की प्रोफाइल को पढ़कर उसे अच्छा लगा और उसने सोचा चलो जोड़ लेते हैं अगर कोई गड़बड़ हुई तो हटा देंगे .

 

उसकी जब बात हुई अमित से तो पता पड़ा वो दिल्ली में रहता हैं  और आर्किटेक्ट हैं ,बस अभी जॉब में लगा हैं .

धीरे धीरे कविता को उससे बात करना अच्छा लगाने लगा था क्योंकि वो काफी आशावादी था ,उसने अमित को बताया के उसके दोस्त उसे नकचड़ी समझते हैं .अमित ने उसे समझाया के वो बस अच्छा सोचे और दोस्तों से घुले मिले  दोस्ती अपने आप हो जाएगी ,अमित की टिप्स कविता के काम आई और उसके बहुत से दोस्त बन गए थे कॉलेज में ,अमित एक अच्छा लेखक था और शायरी काफी अच्छी लिखता था  और कविता उसकी हर शायरी को अपनी डाइरी में लिख लेती थी .

 

कॉलेज में function  होने वाले थे ,कविता ने सोचा वो गाना गाएगी और वो गाने की तेयारी में लग गई ,गाने की प्रतियोगिता से ठीक एक रात पहले उसके गले में कोई परेशानी हो गई ,उसकी आवाज़ बहुत धीमी आ रही थी औ जो गाना उसने सोचा था उसके लिए उसे थोड़ी जोरदार आवाज़ चाहिए थी ,वो काफी परेशां हो गई…उसकी आँखों में आंसू आ गए ,तभी उसे अमित का ख्याल आया उसने कंप्यूटर चालू करा और जैसे ही फेसबुक पर गई तो देखा अमित ऑनलाइन नहीं था वो और परेशान हो गई उसे लगा अब वो गाना नहीं गा पायेगी और वो जोर जोर से रोने लगी .

 

तभी उसे ध्यान आया के अमित कल ही उसे समझा रहा था के कैसे मुश्किलों का सामना करना चाहिए उसने पुराने मेसेज को खोला फेसबुक पर और उसे पढ़ा उसमे अमित ने कहा था “मुश्किलों से डर कर नहीं भागना चाहिए बल्कि मुश्किलों का डट कर सामना करना चाहिए वो आपको सफलता का एक और रास्ता बताती हैं “

कविता ने इस बात को सोचा और खुद से कहा “मैं कल गाना गाऊँगी और जीत कर घर आउंगी “.

कविता अब काफी खुश थी उसने दवाई ली और खुद से कहा के “मैं सुबह तक ठीक हो जाउंगी “

जब कविता सुबह उठी उसकी माँ ने आवाज़ लगाई”कविता उठ जा आज तेरी गाने की प्रतियोगिता हैं ना”

कविता ने जोर से आवाज़ लगाई “हा उठ रही  हूँ माँ ,मेरा गला थोडा ख़राब हैं काली मिर्च की चाय बना दो “

तभी उसकी माँ उसके कमरे में आई और कहा “कविता तुने इतनी जोर से चिल्लाया के पडोसी को भी सुनाई दे गया और तू कह रही हैं तेरा गला ख़राब हैं ” कविता ने सुना और कहा “सच माँ ” वो बहुत खुश हो गई और माँ के साथ डांस करने लगी .

कविता जब कॉलेज पहुची उसका आत्मविश्वास सातवे आसमान पर था और उसे भरोसा था के वही ये प्रतियोगिता जीतेगी ,और जब उसने गाना गाना शुरू करा जो जहा था बस वही रुक गया और जैसे ही गाना ख़त्म हुआ तालियों से सारा हाल गूंज रहा था और सभी छात्र once more  की आवाज़ लगा रहे थे ,

कविता ने ये प्रतियोगिता जीत ली और वो मन ही मन अमित का शुक्रिया अदा कर रही थी .

singing competition

रात को जब अमित ऑनलाइन मिला तो उसने अमित को सारी कहानी बताई ,अमित ने उसे बधाई दी और अपना मोबाइल नंबर भी दिया ,कविता ने भी उसे अपना मोबाइल नंबर दिया .

दोनों की बातें अब काफी बढ़ गई और कविता ने आजकल बहुत देर तक उससे फ़ोन पर बातें करने लगी ,शायद दोनों के बीच कुछ चल रहा हैं .कविता को लगा उसे अमित से प्यार हो गया हैं पर कैसे कहे जबकि वो उससे आजतक मिली भी नहीं हैं .

 

क्या कविता अंजान से दोस्त से प्यार का इजहार कर पायेगी  और कविता कब मिल पायेगी अपने इस दोस्त से.

जानने के लिए पढ़िए अगला भाग.

वो अंजाना चेहरा-1

“कविता ….कविता…. चल उठ जा कॉलेज नहीं जाना हैं क्या ” माँ की इस आवाज़ को सुनकर भोली भली सी कविता ने कहा “जी माँ “.

 

कविता आज एम.बी .ए करने के लिए कॉलेज जा रही थी ,एस.डी.एम  शहर का सबसे अच्छा कॉलेज हैं ,कविता काफी उत्साहित थी के चलो आज फिर से नए दोस्त बनेंगे कॉलेज में ,वैसे अपने पुराने दोस्तों को वो भूली नहीं थी ,आज भी उसे अपने इंजीनियरिंग के मित्र याद आते हैं खासकर  राहुल ,श्रेया ,खुशबु ,रोनित और नंदिनी . 

 

कविता फटाफट तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी 

जैसे ही क्लास में उसने कदम रखा ,लगभग ३० छात्र वहा पर बैठे थे ,और सभी ४-५ के झुण्ड में बातें कर रहे थे 

 

परन्तु  जैसे ही कविता ने क्लास में प्रवेश करा सबकी बातचीत बंद हो गई ,खासकर लडको की ,क्योंकि कविता बहुत खूबसूरत थी .उसके चेहरे पर गिरती उसकी लटे उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी .

 

कविता एक झुण्ड की तरफ बढ़ी  और कहा ” हेलो मैं कविता निगम ” एक लड़की निधि ने उससे हाथ मिलाया  परन्तु बाकि लडकियो ने सिर्फ हेलो करा और लडको का तो क्या कहना वो तो उससे दोस्ती करने को बेक़रार थे , पर कविता किसी से इतनी जल्दी दोस्ती नहीं करती थी इस कारण कई लोगो को लगा वो नकचड़ी हैं ,खेर फिर भी उसने दोस्त तो बना लिए  जैसे निधि ,साक्षी,सनी ,सोहेल .

facebook chat

 

इसी तरह उसके कॉलेज के दिन बिताते गए और उसे अब नए कॉलेज में अच्छा लगाने लगा पर उसे एक बात बार बार कचोट रही थी के कई बार वो अकेली रह जाती थी क्योंकि निधि अधिकतर सनी (उसका boyfriend )के साथ रहती थी ,सोहेल कॉलेज कम आता था  और साक्षी  भी इधर उधर रहती थी .

 

उसकी क्लास में एक लड़का था संजय जो काफी चुप चाप रहता था ,एक दिन वो संजय के पास गई और कहा “हेलो  मैं कविता “संजय ने भी उसकी तरफ हाथ बढाया ,दोनों की दोस्ती हो गई पर संजय बहुत कम बोलने वालो में से था इसीलिए कविता को अकेलापन  लगता था ,संजय ने कविता को फेसबुक के बारे में बताया  और कविता ने उस पर अकाउंट बना लिया .

 

क्या ये फेसबुक कविता की जिंदगी में कुछ नयापन लायेगा,क्या कविता का अकेलापन दूर होगा.जानने के लिए पढ़िए अगला भाग जल्द ही .

(इस कहानी के सभी पात्र और घटनाये काल्पनिक हैं इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं हैं और अगर ऐसा हुआ भी तो इसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा )