चाँद की कहानी

सूरज के जाते ही 

सांझ ने डेरा डाल लिया

चुपके से अंगड़ाई लेते हुए  फिर 

चाँद आ गया 

 

देने तपती गर्मी से राहत 

बढाने  उन दोनों के बीच चाहत 

शरमाते इठलाते हुए लो फिर 

चाँद आ गया 

 

मुझसे नहीं उन तारो से पूछो

उस नदी उस किनारों से पूछो

पुछो उन बच्चो से और उनकी माँ से 

रोज़ क्यों करते हैं वो इंतज़ार चाँद का 

story-of-moon

तारो को गगन में  सजाने 

नदी को शीतल बनाने ,नाव को किनारे पहुचाने

बच्चो को उनके पिता और 

उस माँ को अपने पति से मिलाने

फिर चंचल सा भोला सा 

चाँद आ गया 

 

सबको मिलाता सबको अपनाता 

चैन की नींद दिलाता हैं 

अगले दिन फिर मज़िल को 

पाने निकलना हैं 

ये बतलाता हैं 

एक दिन एसा भी आता हैं 

जब चाँद नहीं आता हैं 

तब ना तारे ,ना नदी ,ना किनारे ,

ना बच्चे ,ना माँ घबराती हैं 

 

क्योंकि अँधेरे के बाद फिर उजाला 

आता हैं  और 

मुस्कुराते हुए फिर  से 

चाँद आता हैं ……

(चिराग)

मुन्नी-4

मुन्नी ने संध्या के वक़्त उस औरत से मिलने का फैसला करा . “तुम किस गाँव की हो “मुन्नी ने कहा ….शंकरपुर ….जो सागर किनारे हैं ..
फिर मुन्नी ने पुछा तुम ये धंधा कब से कर रही हो.
फिर मुन्नी को उस औरत ने बताया …मेरी शादी गाँव के एक मछुवारे से हुई थी …परन्तु वो पैसा कमाने विदेश चला गया जब कई दिनों तक नहीं आया तो में एक सेठ से शादी कर ली और अपनी लड़की को अपनी  सांस के पास छोड़ कर वहा से चली गयी.पर उस सेठ ने मुझसे बाद में धंधा करवाया और में फिर इस धंधे में आ गई .

मुन्नी ने उससे उसके पति और साँस का नाम पूछा …जब मुन्नी ने नाम सुने तो ….मानो उसके पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गई ….उसे विश्वास नहीं हो रहा था के जो औरत उसके सामने कड़ी हैं वो उसकी माँ हैं ,मुन्नी से उसे खुद क बारे में नहीं बताया और वहा से चली गई .
 अगले दिन अख़बार में खबर आई…एक बहुत बड़े गंग वार में जैक नाम के डॉन को मार डाला गया हैं ,
कुछ दिनों  बाद जब जैक के हत्यारे  को पकड़ लिया गया,जब हत्यारे को कोर्ट में लाया गया तो मुन्नी बड़ी दुविधा में पद गई क्योंकि वो हत्यारा और कोई नहीं उसका बचपन का दोस्त रमेश था ,अब मुन्नी बड़ी ही धर्मसंकट में  पद गई …लेकिन उसने कानून के अनुसार जो सजा देनी थी रमेश को वही दी …मुन्नी ने एक बार रमेश से मिलने का सोचा …रमेश ने मुन्नी को बताया के वो उसे बहुत चाहता था …परन्तु जब वो सचिन को चाहने लगी …तो उसके मन में द्वेष आ गया और उसने सचिन को मरवा दिया …उसके बाद वो इस दलदल में फसता चला गया …रमेश ने कहा मुन्नी में तुम्हारे प्यार और पिता दोनों को मार डाला …

क्या पिताजी को…परन्तु वो तो विदेश चले गए थे….तुम कब मिले उनसे …मुन्नी ने कहा .
रमेश ने  कहा के जिस जैक को उसने मारा हैं वो उसके पिताजी थे….मुन्नी की जिंदगी में जो ये तूफ़ान आया उससे मुन्नी काफी परेशान हुई ….

अगले दिन मुन्नी की माँ यानी उस औरत के केस के फैसले का दिन था …मुन्नी ने उस औरत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उस औरत को एक पत्र भेजा जिसमे उसने लिखा के वो उसके बेटी हैं और उसके पिताजी को उसके दोस्त ने मार डाला हैं…..

जब उसकी माँ ने वो पत्र पढ़ा तो शर्म से उसका सर झुक गया..उसने सोचा के केसी माँ हैं वो अपनी बेटी से धंधा   करवा रही थी …जीने से अच्छा हैं वो मर जाये और उसने जेल में आत्महत्या कर ली .



मुन्नों की ज़िन्दगी जिस तरह से गुजारी अब तक ..शायद उससे उसे गहरा झटका लगा….उसके सारे रिशते एक ही पल में उसके  सामने ए और चले गए .
उसने जज की कुर्सी से इस्तीफा दे दिया और अपने गाव वापस जा कर एक स्कूल खोलकर बच्चो को पढ़ने लगी .


(मेरे द्वारा लिखी गई ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक हैं इसके पत्रों का किसी से भी सम्बन्ध नहीं हैं )

मुन्नी -3

अब तक आपने पढ़ा के मुन्नी और सचिन एक दुसरे से प्यार करने लगे थे ,लेकिन रमेश भी मुन्नी को बहुत चाहता था परन्तु उसने अपने दिल की बात कभी मुन्नी को नहीं बताई…पर जब उसे सचिन और मुन्नी के बारे में पता चला…उसके मन में सचिन के प्रति द्वेष आ गया …उसने सोचा के कैसे भी करके सचिन को रास्ते से हटाना हैं . रमेश जिस गेरेज पर काम करता था वहा पर अक्सर एक आदमी अपनी गाडी ठीक करवाने आता था ,उसकी गाडी हमेशा रात को आती थी गेरेज बंद होने के बाद और सुबह तक चली जाती थी …गेरेज के मालिक ने कभी रमेश को उस गाडी को हाथ लगाने नहीं दिया .रमेश ने फिर पता करा तो उसे मालूम हुआ के ये आदमी बहुत बड़ा स्मगलर हैं ..और कई खून भी करवा चूका हैं ….रमेश ने सोचा अगर इस आदमी से मदद मांगी जाए तो सचिन को मारने में कोई दिक्कत नहीं होगी .

      आख़िरकार रमेश ने एक दिन उस आदमी की मदद से सचिन को मार डाला ,सचिन की मौत की खबर सुन कर मुन्नी को सदमा सा लग गया ……और उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा ….







उधर रमेश एक दिन गेरेज पर काम कर रहा था तो अचानक वहा पुलिस आ गयी और रमेश  को गिरफ्तार करके ले गयी…रमेश के खिलाफ पुलिस के पास सबूत थे.जब ये बात मुन्नी को पता पड़ी तो उसने सोच लिया के आज के बाद कभी रमेश से बात नहीं करेगी.रमेश के खिलाफ अदालत में कुछ गवाह पलट गए और पाके सबूत नहीं होने के वजह से उसे सिर्फ ५ साल की कैद हुई   .










 पांच साल बाद जब रमेश जेल से बाहर आया तो सबसे पहले चाल गया मुन्नी के बारे में पता लगाने परन्तु……वो उसे वहा नहीं मिली.उसने उसे पूरी मुंबई में तलाशा ….परन्तु मुन्नी का कोई पता नहीं पड़ा .एक दिन जब रमेश एक दारू के ठेके पर गया तो वहा उसे एक आदमी मिला और उसे काम दिलवाने के बहाने ले गया …..अपने साथ .रमेश ने सोचा भी नहीं था और वो उसेउसी आदमी के पास ले गया जिसकी मदद से उसने सचिन को मरवाया था . 

      उस आदमी ने रमेश से कहा के वो उसका धंधा संभाले …रमेश ने उसकी बात मान ली और कुछ ही सालो में रमेश ने उसके सारे धंधो का मास्टर बन गया अब वो रमेश दादा के नाम से जाना जाने लगा.

                        इस बीच मुन्नी के साथ क्या हुआ ….
                                                           मुन्नी अकेली हो चुकी थी और अकेली लड़की खुली तिजोरी के समान होती हैं ,उसे कई लोग अब गलत नज़रो से देखने लगे थे …..एक दिन एक औरत से कोठे पर ले गयी और मुन्नी से धंधा करवाने लगी. मुन्नी वहा १२ दिन ही रुकी और फिर वहा से भाग गयी.मुन्नी के एक कॉल सेण्टर में जॉब कर ली ….और आगे पढाई जारी रखने  लगी .


रमेश का धंधा बड़े जोरो पर था ….एक दिन उसके पास एक कॉल आया …सामने से आवाज़ आई  जैक सर तुमसे मिलाना चाहते हैं ,रमेश ने हां कर दी ….रमेश और जैक दोनों एक दिन मिले, जैक भी स्मगलिंग करता हैं और उसका व्यापर और बड़ा हैं …दोनों साथ मिलकर काम करने लगे .





एक दिन अदालत में एक केस आया एक महिला जो सेक्स रेकेट  चलाती  थी वो पकड़ा गयी थी …..अदालत में जब वो पेश हुई उसके तो होश उड़ गए उसने वकील से पुचा ये जज  कोन हैं ..उसने कहा नेहा मैडम हैं…..हां ये वाही लड़की थी जिससे वो औरत धंधा करवाना चाहती थी …मुन्नी जज बन गयी थी ….मुन्नी ने उसकी दलील सुनी और दलीलों में मुन्नी को ये पता पड़ा के ये औरत उसके गाव की हैं …
मुन्नी ने अगले दिन फैसला सुनाने को कहा….

रात को वो औरत ने कहा के वो मुन्नी से मिलाना चाहती हैं …..मुन्नी उस औरत से मिली और क्या बात करी  उससे ….रमेश और जैक का धंदा कैसा चल रहा था ….आगे क्या होगा जानने के लिए पढ़िए अगला और अंतिम भाग .

मुन्नी-2

अब तक आपने पढ़ा के मुन्नी को सच्चाई पता नहीं थी  और किस तरह उसकी माँ उसे छोड़ कर चली गयी थी ….वो भी तब जब वो सिर्फ १ साल की थी .
दिन बितते  गए मुन्नी ने स्कूल जाना शुरू कर दिया था  और पढने में भी वो काफी तेज़ थी .धीरे धीरे मुन्नी ने १२वी  उतीर्ण कर  ली 
मुन्नी अब जवान हो गयी थी और खूबसूरती में वो अपनी माँ से चार कदम आगे थी …गाव के कई लड़के उस पर मरते थे पर उसने किसी को भाव नहीं दिया सिवाए रमेश(मुन्नी का एक मात्र दोस्त ).
अब आगे पढ़ने के लिए उसे शहर  जाना था और जो शहर वो जाना चाहती थी वो था मुंबई . परन्तु मुंबई जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे .यहाँ तो वो जैसे तैसे पढ़ ली थी पर अब आगे कैसे जाये .

मुन्नी का एक दोस्त भी था रमेश जो गावं के ही मछुआरे का लड़का था दोनों काफी अच्छे दोस्त थे ,जब मुन्नी ने अपनी परेशानी रमेश को बताई तो उसने कहा के वो भी उसके साथ मुंबई जायेगा वो वहा काम करके पैसे कमाएगा और मुन्नी का खर्चा भी उठाएगा.
परन्तु मुन्नी ने मना कर दिया उसने कहा मैं तुम पर बोझ    नही  बनना चाहती हूँ, तब रमेश ने कहा दोस्त कोई बोझ नही होते और मुझे भी कुछ काम करना हैं तो मैं भी कुछ काम धुंध लूँगा वहा मुझे अपनी जिंदगी इस सागर किनारे नहीं बितानी हैं.
आखिरकार रमेश की बात मुन्नी ने मान ली पर दादी की मंजूरी भी जरुरी थी.
दादी से मुन्नी ने कहा के वो मुंबई जाना चाहती हैं पढने ,पर दादी ने मना कर दिया और कहा के वहा अकेले कहा रहेगी कही कुछ हो गया तुझे तो…..मुन्नी ने कहा आप चिंता ना करो रमेश भी मेरे साथ जा रहा हैं ,हम दोनों रह लेंगे वहां .

आखिरकार मुन्नी और रमेश दोनों मुंबई रवाना हो गए .
 मुंबई पहुच तो गए दोनों परन्तु मुंबई तो सपनो का शहर हैं  …यहाँ सपने इतने आसानी से पुरे नहीं होते.

मुन्नी और रमेश १ हफ्ते तक घर ढूदते रहे और 
आखिरकार उन्हें एक चाल में जगह मिल ही गयी .

अब चाल का जीवन बहुत अलग था ….रोज पानी लाना झगडे सुनना और भी कई तल्कीफ होती थी चाल में ,
कुछ दिनों बाद मुन्नी को भी कॉलेज में दाखिला मिल गया और रमेश को भी एक गेरेज पर काम मिल गया …..
दोनों की जिंदगी अच्छी चल रही थी ….तभी अचानक एक दिन मुन्नी की मुलाकात सचिन से हुई ….सचिन भी उसी चाल मैं रहता था और मुन्नी के कॉलेज मैं ही पढता था .
“तुम नेहा हो ना” (मुन्नी का नाम कॉलेज में नेहा था ) सचिन  ने कहा .
“हाँ पर तुम कोन मैंने पहचाना नहीं तुम्हे ….”
“मैं सचिन तुम्हरे कॉलेज में ही पढता हूँ यही चाल में रहता हूँ” .

फिर दोनों में दोस्ती हो गयी अब रोज साथ जाना और साथ आना और मुंबई साथ घुमाना करते थे…
एसा लग रहा था के प्यार के फूल दोनों के दिल मैं खिल गए हैं .
लेकिन कहते हैं ना ..के प्यार आग का दरिया हैं और डूब कर जाना हैं 
इसीलिए प्यार मुसीबत ना लाये एसा हो नहीं सकता ….
तो एसा के हुआ इसी क्या मुसीबत आई या आने वाली हैं दोनों की ज़िन्दगी में 
जानने के लिए पढिये अगला भाग