कौन रहता हैं इस शहर में ,
अनजाने लोग जहा मिलते है अब 
कौन रहता है इस शहर में,
रातो के साए जहा आते नहीं अब 
बंद दरवाजे है , खिड़की पर ताले है ,
चोखट पर धुल नहीं है अब 
कौन रहता है इस शहर में …..
 
ख्वाब तलाशने निकलना है ,
खुली आँखों से नींद आती नहीं अब 
 
आसमान का रंग बदल चूका है ,
पानी में भी तस्वीर नहीं दिखती अब 
 
मुस्कराहट की याददाश्त खो चुकी है ,
आंसुओ के सैलाब हर कदम पर है अब 
 
 
कौन रहता है इस शहर में …..
विचारों की परछाई दिख रही है ,
राज़ बेघर हो गए है यहाँ अब 
सिक्को की आवाज़ अब सुनाई देती नहीं ,
हवाओ में उड़ती है रोशनी उनकी अब 
जिंदगी से बेवफाई सबने की है ,
और मौत से डरते है सब 
बचपन में जवानी ,जवानी में बुढापा है ,
मौत के बाद भी चैन नहीं है अब
कौन रहता है इस शहर में …..

(चिराग )

Categories: Poems

9 Comments

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया · 11/11/2012 at 11:04 am

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |

RECENT POST:….आई दिवाली,,,100 वीं पोस्ट,

म्यूजिकल ग्रीटिंग देखने के लिए कलिक करें,

sushma 'आहुति' · 11/11/2012 at 11:04 am

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति………

Manu Tyagi · 12/11/2012 at 6:39 am

बहुत बढिया । आपको दीपावली की शुभकामनायें

Chirag Joshi · 13/11/2012 at 9:32 pm

deepawal ki bahut bahut shubhkaamnaye
dhanaywaad…

Chirag Joshi · 13/11/2012 at 9:33 pm

deepawali ki bahut bahut shubhkaamnaye
dhanaywaad…

Chirag Joshi · 13/11/2012 at 9:33 pm

deepawal ki bahut bahut shubhkaamnaye
dhanaywaad…

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया · 23/11/2012 at 7:52 pm

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति,

पोस्ट पर आने के लिए आभार,,,,
recent post…: अपने साये में जीने दो.

Abhishek · 07/12/2012 at 6:46 am

bahut badhiya chirag…one of the deepest thoughts from your side…cheers

Ritu · 27/07/2013 at 10:47 am

Beautifully written…….. reminds me of Uttaranchal in some lines.

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