Poems

जरा सा रुक कर देखना कभी

जरा सा रुक कर देखना कभी कब्रिस्तान मे भी, शायद कोई अभी भी जिंदगी की जंग लडता हुआ मिल जाये जरा सा रुक कर देखना कभी उस टुटे मकान मे भी, शायद अभी भी कोई सपनो के महल की दिवारे चुनते मिल जाये जरा सा रुक कर देखना कभी  सुलझे Read more…

By Chirag Joshi, ago