Poems

चल रही हैं दुनिया

धोखे पर ही चल रही हैं दुनिया, जो सच कहा मैंने तो मुझे गुनहगार कह रही हैं दुनिया   इंसान ही इंसान को जानवर कह रहा हैं, जानवरो का तो गोश्त खा रही हैं दुनिया ना अपने की फिक्र, ना पराये की खुशी, सिर्फ “ मैं ” मे सिमट गई Read more…

By Chirag Joshi, ago