Poems

वो ….

मेरे हर सफ़र का साथी था वो ना जाने कब हवा चली और धुँआ हो गया वो   मेरी हर नजर का  दर्पण था वो ना जाने कब धुप गई और अँधेरा हो गया वो   मेरी चादर का एक किनारा था वो ना जाने कब रास्ते में काँटा आया Read more…

By Chirag Joshi, ago