Poems

वो था दोस्त,

    बचपन मे जब पार्क मे जाता था, तो मेरे लिये जो झुला-झुलने का नबंर लगाता , मेरी पेंसिल की नोंक टूट जाने पर , अपनी पेंसिल को तोड्कर जो देता , वो था दोस्त, टिफिन मे जो मेरी पसंद का खाना लेकर आता, किसी से भी मेरी खातिर Read more…

By chiragjoshi, ago
Poems

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद , नशा चढ़ता हैं  शाम के बाद शोला यूँ तो धडकता नहीं दिल में , लगती हैं आग मन में जब देखता हूँ तुझे किसी और के साथ , इश्क होता हैं दोस्ती के बाद……. कहना चाहूँ तुझसे जब दिल की बात  बता दूँ Read more…

By Chirag Joshi, ago