कहाँनीया कब और कहा बन जाये हम कह नही सकते, पर एक ऐसी जगह है जहा हर रोज़ , हर पल एक कहाँनी जन्म लेती है । ये जगह शायद इसिलिये ही बनी है और फिर जो भी यहा आता है , वो खुद कई कहाँनीयो के जाल अपने दिमाग मे बुनते रहता है । ये जगह है “कालेज़” , कालेज़ दुनिया की एकलौती ऐसी जहा कई कहाँनीया, अलग अलग किरदारो के द्वारा रची गई है । एक ऐसी ही कहाँनी आज आप सबको बताने जा रहा हू  । इस कहाँनी के सारे किरदारो के नाम बदले हुये है पर ये कहाँनी एक सच्ची है और मेरे दिल के करीब है ।

आयुष ने 12वी मे अपनी आई.आई.टी की जमकर की और वो आई.आई.टी मे जाने का सपना 11वी कक्षा से देख रहा था । आयुष की कोशिश और उसकी मंजिल के बीच मे वैसे तो फासले कम थे, परंतु जो हुआ वो उसने भी नही सोचा था । आयुष का सपना टूट गया और आई.आई.टी के दुसरे पडाव मे वो फेल हो गया , खैर आयुष ने अपने शहर के ही एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज़ मे दाखिला ले लिया । कालेज़ के पहले दिन से लेकर तो अगले कुछ हफ्तो तक वो हर पल आई.आई.टी मैंस के पेपर के बारे मे ही सोचता था । जब एक महीना बिता तो आयुष का दिल नये कालेज़ मे लगने लगा , नये दोस्त और नयी जगह कई बार पुरानी यादो को भुलाने मे मदद करती है ।

पहले साल मे आयुष का रिजल्ट भी ठीक नही रहा और साथ ही आयुष को ये अहसास भी हो गया था के उसने अपनी कैपिबिलिटी से कम मेहनत की है । आयुष को कंप्यूटर का काफी शौक था और इंटरनेट पर उसकी मुलाकात हुई एक लड्की से हुई ,बातो –बातो मे पता लगा के वो लडकी उसी के कालेज़ मे , उसी के कोर्स मे दुसरे सेक्शन मे पढती है । आयुष ने उससे वादा किया के अब जब भी कालेज़ शुरु होंगे वो उससे मिलेगा । ना जाने क्यो आयुष के हाव भाव बदलने लगे , वो आयुष जिसने अपना आत्मविश्वास खो दिया था । वो एक अलग ही रंग और रुप मे कालेज़ गया और जाते ही उसने उसे ढुढना शुरु किया । उसने अपने खास दोस्त विशाल को लिया और कहा के चल भाई – “ जरा आते है “। विशाल ने पूछा – “ कहा जाना है “। आयुष ने उसी सारी बात बताई ,विशाल – “ अच्छा तो तू शिवानी के बारे मे बात कर रहा है और उसे ढूंढ रहा है “ आयुष –“ हा भाई तू जानता है उसे “ विशाल – “ जानता तो नही बस एक बार गरिमा ने मिलवाया था “।

आयुष अपने दोस्त विशाल के साथ गया और जब पहली बार उसने शिवानी को देखा तो बस देखता रहा गया । सिम्पल और सोबर , एक दम वैसी लडकी जैसी आयुष सपनो मे देखा करता था । उसे कुछ देर लगा जैसे ख्वाब देख रहा हो । शिवानी ने आयुष को देखा तो नही था । पर वो उसने उसे पहले ही ढूंढ रखा था । शिवानी –“ हलो आयुष ,कैसे हो “ आयुष – “मैं बढिया हूँ तुम कैसी हो “ शिवानी – “ आई.एम फाईन”. उसके बाद शिवानी आयुष को अपने समर वेकेशन के बारे मे बताती रही और वो सुनता रहा । आखिर मे आयुष ने कहा – “ शिवानी मे तुमसे कैन्टीन मे मिलता हू “शिवानी – “ओके माय फ्रेंड” ।

आयुष और शिवानी कुछ ही दिनो मे अच्छे दोस्त हो गये , दोनो अपनी हर बात एक दुसरे को बताते थे । आयुष ने शिवानी से कभी कहा नही पर आयुष मन ही मन शिवानी से प्यार करने लगा था । उसके प्यार करने का कारण सिर्फ शिवानी का स्वभाव नही था । शिवानी के कारण ही आयुष को अपना खोया आत्मविश्वास पा लिया था । आयुष ने सोचा के वो शिवानी से अपने दिल की बात कह दे पर उसने सोचा अगर शिवानी रुठ गई तो ।

half relationship

शिवानी ने भी आयुष से कभी कहा नही परंतु उसकी बातो से यही लगता रहा के वो भी शायद आयुष को चाहती थी । उस साल एक सबजेक्ट काफी कठिन था और पूरी क्लास मे सबको डर था के कही इस सबजेक्ट मे फेल ना हो जाये । ये डर शिवानी को भी था । शिवानी और आयुष साथ-साथ कभी पढाई नही करते थे क्योंकी आयुष अकेले पढना पसंद करता था । इसिलिये शिवानी ने इस सबजेक्ट से डर की बात आयुष को नही बताई । आयुष को जब बात पता लगी उसने शिवानी से कहा –“ तुम मुझे अपना दोस्त नही मानती “ शिवानी – “ नही आयुष ऐसी बात नही है “ आयुष- “तो तुमने मुझे नही बताया के तुम्हे इस सबजेक्ट मे दिक्क्त है , मैं तुम्हे पढा देता “ शिवानी – “आयुष तुम्हे ये सबजेक्ट आता है “ आयुष –“ हा आता है ,कल से मैं तुम्हे ये सबजेक्ट पढाऊंगा “

आयुष खुद उस सबजेक्ट मे कमफर्टेबल नही था परंतु उसे शिवानी को पढाना था तो बस लग गया वो पढने उसने एक रात मे 2 चैप्टर पढ डाले और फिर अगले दिन शिवानी को पढाया । धीरे-धीरे आयुष का पढाई मे इंटरेस्ट वापस आने लगा और जब उस साल का रिज्ल्ट आया तो आयुष ने क्लास मे तीसरी पोजिशन पाई । आयुष ने पूरी एक्जाम के दौरान शिवानी को पढाया और दोनो काफी वक्त साथ रहने लगे । सबको लगने लगा के ये दोनो एकदुसरे को चाहते है । अगले साल भी आयुष शिवानी को पढाता रहा और एक दिन उसने अपने दोस्त विशाल से कहा – “ आज मैं शिवानी को अपने दिल की बात बताने जा रहा हू “  विशाल –“  भाई मेरी बात माने तो रुक जा , मुझे लगता है ये थोडा जल्दी होगा “  आयुष और विशाल काफी अच्छे दोस्त थे, इसीलिये आयुष ने उसकी बात मान ली । एकदिन शाम को आयुष अपने दोस्त करण से मिलने गया । आयुष और करण स्कूल से साथ थे और करण आयुष के ही कालेज़ मे दुसरे कोर्स मे पढता था । करण को ये नही पता था के आयुष शिवानी को चाहता है । करण ने बातो – बातो मे कहा – “ यार वो शिवानी ,तो राज के साथ घुम रही है “ आयुष –“ कौन वो राज जो दुसरे शहर से हमारे कालेज़ मे पढने आता है “ करण –“ हा भाई वही वो मेरे कोर्स मे ही तो है “ आयुष –“ तो तू ये कहना चाहता है के वो दोनो एक दुसरे से …. “ करण – “ हा वो तो एक दुसरे को पहले साल से जानते है और तब से दोनो के बीच कुछ चल रहा था “  आयुष  के तो मानो पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गई उसे कुछ समझ नही आ रहा था । उसे दुख इस बात का नही था के शिवानी और राज़ एक दुसरे से प्यार करते है । उसे इस बात का गम था के जिसे वो अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा उसने उससे ये बात छुपाई और सीधे –सीधे ना सही घुमा फिराकर शिवानी ने भी ये आयुष को दोस्त से बढकर माना था ।

आयुष कुछ दिनो तक कालेज़ नही गया । शिवानी ने भी उसे फोन किया पर उसने जवाब नही दिया , उसे लगने लगा था के शिवानी ने उसे धोखा दिया है । जब आयुष कुछ दिनो बाद कालेज़ पहुचा तो शिवानी और राज़ को साथ पाया । वो उन्हे दूर से देखकर निकल गया , उसी दिन कैंटिन मे शिवानी ने आयुष  से कहा – “ क्या बात है ,कहा थे इतने दिन “  आयुष – “ कही नही काम था “  शिवानी – “ हमे भी बताओ क्या काम था “ आयुष- “ नही बस काम था “  शिवानी-“ तो तुम हमें नही बताओगे, यही है तुम्हारी दोस्ती “ आयुष गुस्से मे था पर अपने को काबू कर के उसने शिवानी से वो बात पूछ ही ली । शिवानी कुछ देर तो हिचकिचाई और फिर कहा – “ऐसा नही है के मैं तुम्हे बताना नही चाहती थी पर सब अचानक ही हुआ “ आयुष ने शिवानी से कहा के – “तुम फिर हर दम मेरे साथ रहती थी , मुझसे ऐसे बात करती थी जैसे तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो “

शिवानी ने जब ये सुना वो सब बात समझ गई और आयुष से कहा – “ तुम म्रेरे दोस्त से ज्यादा हो,पर बायफ्रेंड से कम हो “  ये कहने के बाद शिवानी वहा से चली गई । आयुष काफी देर तक ये सोचता रहा के आखिर ये कैसा रिश्ता है । उसने कभी इस रिश्ते के बारे मे नही सुना था ।

उसके बाद आयुष और शिवानी दोनो एक दुसरे के – दोस्त से ज्यादा, पर गर्लफ्रेंड और बायफ्रेंड से कम रहे “

“I am sharing a Half relationship story at BlogAdda in association with #HalfGirlfriend


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