कोरे कागज़ पर अल्फाजो की बहार आई है,
अहसासो ने फिर दिल मे एक धुन बजाई है
,
बहुत दिन हुये ….
मैंने आज फिर कलम उठाई है
नये दौर मे एक नयी आवाज़ आई है,
बीते वक्त की तस्वीर फिर आखो मे समाई है
,
बहुत दिन हुये ….
मैंने आज फिर कलम उठाई है
my-pen-chirag
कुछ दुरी पर छोड दिया था जिसे,
वो मुस्कान मेरी लौट आई है
,
खुला आसमान है पाने को,
कोशिशो मे नये रंग भरने को
,
विश्वास की वो डोर फिर खुदा ने पकडायी है
,
बहुत दिन हुये ….
मैंने आज फिर कलम उठाई है
रुक फिर जाऊ शायद मंजिल से पहले,
पर अब रुक कर बढने की हिम्मत आई है….
बहुत दिन हुये ….
मैंने आज फिर कलम उठाई है…

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