poem-on-courage
नाव से नदी तो हर कोई पार करता हैं,
जो मैं लहरो से लड़ कर पार करू तो कोई बात हैं, 
आसमान में उड़ने का ख्वाब तो सभी देखते हैं,
जो मैं आसमान का अंत ढूंढ  लू  तो कोई बात हैं,
ख्वाहिशे तो सभी करते हैं कुछ पाने की,
जो मैं मंज़िलों से दोस्ती कर लू तो कोई बात हैं,
इबादत तो सभी करते हैं खुदा से ,
जो खुद मेरी इबादत का इन्तेजार करे तो कोई बात हैं ,
कोशिश  तो सभी करते हैं जीतने की,
जो मैं जीत को अपनी महबूबा बना लू तो कोई बात हैं,
चंद लम्हों की ये ज़िंदगानी ,
जो मैं हर पल में ज़िंदगानी जी लू  तो कोई बात हैं 


C.J SPECIAL
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Categories: Poems

2 Comments

संजय भास्‍कर · 25/12/2015 at 3:12 am

आपका अंदाज़ बहुत ख़ास है

Chirag Joshi · 25/12/2015 at 3:13 am

shukriya sanjay bhai

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