भीनी भीनी सी मिट्टी की महक आयी
ओस की बूंदों से पत्तो पर चमक आयी 
पीछे मुड़कर जब देखा मैंने 
तो याद तेरी फिर आयी 
अँधेरे  को दूर कर सूरज की रोशनी आयी 
सन्नाटे को चीरती चिडियों की चहचाहट आयी 
राज कई बंद हैं सीने में मेरे 
और उन्हें खोलने हँसी तेरी फिर आयी 
memories-of-love
तेरी बातो का जादू हैं कुछ ऐसा
पत्थर भी सुनने लगे हैं ये कुछ ऐसा 
मधुशाला की और बढ़ते हुए मेरे कदमो को रोकने 
तेरी नशीली निगाहे  फिर आयी 
 
मुस्कुराते हुए वो पल फिर आये ,
तेरी जुल्फों  की छाव ले आये 
सोचा था फिर होगी मुलाकात तुझसे 
पर तुझे मुझसे छिनने  
ज़माने के ये रिवाज फिर आये .
(चिराग )
Categories: Poems

13 Comments

संजय भास्कर · 28/01/2011 at 1:51 am

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

dipayan · 28/01/2011 at 1:51 am

बहुत खूब । सुन्दर रचना । बधाई ।

संजय भास्कर · 28/01/2011 at 1:51 am

शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।
ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

chirag · 28/01/2011 at 1:53 am

@sanjay ji
thanks sir
aapako agar mera blog accha laga ho to follow kare

chirag · 28/01/2011 at 1:53 am

@dipayan ji
thanks

क्षितिजा .... · 28/01/2011 at 11:05 pm

ye yaadein hi to hain jo saath nibhatin hain …. baaki to sab chale jaate hain … khoobsurat rachna 🙂

chirag · 28/01/2011 at 11:13 pm

@shitija….yes u are right…
thanks for the comment

Angie · 31/01/2011 at 12:51 am

Hey Chirag!! Who's d inspiration btw????

Patali-The-Village · 31/01/2011 at 12:51 am

ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना| बधाई ।

chirag · 31/01/2011 at 12:56 am

@patali thanks

chirag · 31/01/2011 at 12:57 am

@anjali …insipiration is the one whom i loved once upon a time

: केवल राम : · 31/01/2011 at 7:29 am

तेरी बातो का जादू हैं कुछ ऐसा
पत्थर भी सुनने लगे हैं ये कुछ ऐसा

बहुत सुंदर
एक एक शब्द पूर्ण अर्थ का बोध करता है ..और आपकी कविता की शैली बहुत सशक्त है ..यूँ ही अनवरत लिखते रहें …शुभकामनायें

chirag · 31/01/2011 at 7:38 am

@raam ji
thanks bahut accha laga aap k blog visit karne par

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *