आज़ादी क्या हैं ?
कही भी थूकने की , लुटने की आज़ादी
सरेआम लडकियो को छेड़ने की,
  दिनदहाड़े किसी को भी मारने की आज़ादी
 पेट्रोल की जगह केरोसिने डाल कर 
  प्रदुषण फैलाने की आज़ादी
 जंगलो को काटकर ,
   घर बनाने की आज़ादी
dont-do this
 
 गरीबो पर जुल्म करने की
    मजहब के नाम पर लड़ने की
  बच्चो से काम करवाने की आज़ादी
   रिश्वत से ईमान खरीदने और बेचने की
      दहेज़ के नाम पर लडकियो को जलाने की आज़ादी
   50 सालो से झंडा फहरा रहे हैं
    पर 50 बार भी नहीं सोचते हैं
      किसी को मारने,
लडकियो को जलाने,
 जंगलो को काटने ,
  रिश्वत लेने से पहले
     क्या यही हैं हमारी आज़ादी के मायने ?
(चिराग )
Categories: Poems

7 Comments

: केवल राम : · 14/08/2011 at 9:28 pm

यह भी एक पहलू है आजादी का अपने सही कहा है आपका आभार

Babli · 15/08/2011 at 5:03 am

सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ भावपूर्ण कविता लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

डॉ॰ मोनिका शर्मा · 15/08/2011 at 5:03 am

Vicharniy hain sare prashn…. saarthak rachna

Blasphemous Aesthete · 15/08/2011 at 9:56 am

Kaash, hum azaadi ke sahi maynein samajh paate.

Achhe vichaar hain.

Cheers,
Blasphemous Aesthete

संजय भास्कर · 15/08/2011 at 9:56 am

सुंदर सन्देश देती प्रस्तुती
स्वतन्त्रता की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Babli · 19/08/2011 at 11:20 am

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

jo · 28/09/2011 at 10:44 am

Bahut sahi prashn uthaye hain aapne. Aajkal sabhi log apne adhikaaron ke liye lad rahe hain, unke kartavya kya hain isse unka koi lena dena nahi hai. Padhkar accha laga ki azadi ke sahi maino ko aapne samjha humein bhi sochne par majboor kiya.

Nice work 🙂

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