काश वो दिन फिर आ जाये
पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 
नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 
काश वो दिन फिर आ जाये 
 
काश वो रबर फिर घूम जाये 
टिफिन काश वो फिर घर से 
लंच टाइम में पापा देने आये 
गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 
वापस आ जाये 
 
childhood-days
एनुअल फंक्शन का वो डांस 
वो नाटक की तयारी 
वो साइकिल की यारी 
काश वापस आ जाये 
 
वो साइकिल का पंचर होना 
वो कम्पास में से पेन चोरी होना 
वो ड्राइंग का  पीरियड
वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद
वो बुक से क्रिकेट खेलना 
काश वापस आ जाये 
 
 
wwf  का वो खुमार 
कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 
वो होली का हुडदंग 
वो संक्रांति की पतंग 
हट …काटा ……हैं  की
वो आवाज़ 
 
काश वापस आ जाये
 
वो दिन वो बीते हुए लम्हे 
आज भी जेहन में हैं मेरे 
बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 
और यादो को ताज़ा कर जाये 
(C.J)
Categories: Poems

17 Comments

Jyoti Mishra · 12/06/2011 at 1:02 am

School days were undoubtedly the best days of everyone's life.
I instantly felt nostalgic after reading it.

Well written !!!

निवेदिता · 12/06/2011 at 5:41 am

किसी के भी जीवन के सबसे स्मरणीय और निश्चिन्त दिन यही होते हैं ,काश वो दिन आ कर वापस जाना भूल जाये …. शुभकामनायें !

ZEAL · 12/06/2011 at 5:41 am

पुरानी यादें ताज़ा कर दीं आपने। एक साथ बहुत से चित्र आँखों के सामने तैर गए….
अच्छा लगा पुरानी यादों में लौटना ।

Where thoughts are Word$ · 12/06/2011 at 9:25 pm

Sooo True..!!!!!!!!!!!!!! 🙂

Those innocent childhood days are the most memorable days in everyone's life!!!!!!!!!!!!!!!!!!
^_^

डॉ॰ मोनिका शर्मा · 12/06/2011 at 9:25 pm

Purani yadon ka jeevant varnan…. Sunder panktiyan

Blasphemous Aesthete · 12/06/2011 at 9:25 pm

Sach mein, wo din bahut achhe aur yaadgaar the.
Par abhi bhi zindagi achhi hi hai.

Cheers,
Blasphemous Aesthete

Vivek Jain · 12/06/2011 at 9:25 pm

यादें याद आती हैं,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Babli · 12/06/2011 at 9:59 pm

हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गयी! बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने! पुरानी यादों को खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है! बधाई!

devangini · 13/06/2011 at 8:53 am

wow..nice poem..ah! truly those were the days…ur poem took me back to my childhood days! 🙂

Anjana (Gudia) · 14/06/2011 at 11:31 am

beautiful poem! 🙂

Aditya · 15/06/2011 at 10:29 am

purane din yad a gaye… 🙂

ज्ञानचंद मर्मज्ञ · 16/06/2011 at 12:58 am

बचपन की यादें ताज़ा कर गयी आपकी कविता !
आभार !

आशा · 16/06/2011 at 5:28 am

बहुत भाव पूर्ण कविता है |बधाई आप मेरे ब्लॉग पर आए बहुत अच्छा लगा |आप उज्जैन में रहते हैं
जानकार बहुत प्रसन्नता हुई |हम लोग भी ऋषी नगर में {उज्जैन में ) रहते हैं |यदि आपने ऋषी नगर देखा है तो अवश्य मिलिएगा |
आशा |मेरा पता :-
हरेश कुमार सक्सेना
c47 Rishi nagar ujjain

Ritu · 16/06/2011 at 9:32 am

Kash wo din fir aa jaye………kash

chirag · 16/06/2011 at 9:38 am

thanks to everyone
this poem dedicated to all the people who were with me in those days

संजय भास्कर · 20/06/2011 at 12:44 am

बचपन की यादें ताज़ा कर गयी आपकी कविता !
सुन्दर शेली सुन्दर भावनाए क्या कहे शब्द नही है तारीफ के लिए….

Babli · 22/06/2011 at 5:26 am

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *