Poems

वो था दोस्त,

    बचपन मे जब पार्क मे जाता था, तो मेरे लिये जो झुला-झुलने का नबंर लगाता , मेरी पेंसिल की नोंक टूट जाने पर , अपनी पेंसिल को तोड्कर जो देता , वो था दोस्त, टिफिन मे जो मेरी पसंद का खाना लेकर आता, किसी से भी मेरी खातिर Read more…

By chiragjoshi, ago
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वो है कही

कुछ दूर चलके, धीरे-धीरे गुम सी हो गई है आवाज़ वो, कानो को आदत सी हो गई है, खामोशी की अब. धुऑ-धुऑ सा तो नही था, आंखो के आगे , पर तस्वीर उसकी , धूंधला –सी गई है अब . जिक्र बातो मे अक्सर होता है उसका, जुबां पर नाम Read more…

By Chirag Joshi, ago
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मैं रहूंगा

जब तू सुबह उठ कर अपनी जुल्फो को सवार रही होगी , तब सुबह की उस ताज़गी मे , मैं रहूंगा  … मुस्कुरा कर जब तू आइने मे देख रही होगी खुद को , तब उस आइने मे संग तेरे, मैं रहूंगा … दिन मे जब तू बिना कुछ खाये Read more…

By Chirag Joshi, ago
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मैंने आज फिर कलम उठाई है

  कोरे कागज़ पर अल्फाजो की बहार आई है, अहसासो ने फिर दिल मे एक धुन बजाई है, बहुत दिन हुये …. मैंने आज फिर कलम उठाई है नये दौर मे एक नयी आवाज़ आई है, बीते वक्त की तस्वीर फिर आखो मे समाई है, बहुत दिन हुये …. मैंने Read more…

By Chirag Joshi, ago
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बूंद

खुशी हो या हो गम के दिन, साथ हमेशा रहती है…. बूंद,   ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली, साथ हमेशा रहती है … बूंद  हर पल को देखकर , अपने अस्तित्व को बताने …बाहर आ जाती है …बूंद  . खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी , हर बार Read more…

By Chirag Joshi, ago
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हौसला

नाव से नदी तो हर कोई पार करता हैं, जो मैं लहरो से लड़ कर पार करू तो कोई बात हैं,  आसमान में उड़ने का ख्वाब तो सभी देखते हैं, जो मैं आसमान का अंत ढूंढ  लू  तो कोई बात हैं, ख्वाहिशे तो सभी करते हैं कुछ पाने की, जो Read more…

By Chirag Joshi, ago