वो था दोस्त,

वो था दोस्त,

    बचपन मे जब पार्क मे जाता था, तो मेरे लिये जो झुला-झुलने का नबंर लगाता , मेरी पेंसिल की नोंक टूट जाने पर , अपनी पेंसिल को तोड्कर जो देता , वो था दोस्त, टिफिन मे जो मेरी पसंद का खाना लेकर आता, किसी से भी मेरी खातिर जो भिड जाता, टीचर अगर … Read More

वो है कही

वो है कही

कुछ दूर चलके, धीरे-धीरे गुम सी हो गई है आवाज़ वो, कानो को आदत सी हो गई है, खामोशी की अब. धुऑ-धुऑ सा तो नही था, आंखो के आगे , पर तस्वीर उसकी , धूंधला –सी गई है अब . जिक्र बातो मे अक्सर होता है उसका, जुबां पर नाम भी आता है कभी, फिर … Read More

मैं रहूंगा

जब तू सुबह उठ कर अपनी जुल्फो को सवार रही होगी , तब सुबह की उस ताज़गी मे , मैं रहूंगा  … मुस्कुरा कर जब तू आइने मे देख रही होगी खुद को , तब उस आइने मे संग तेरे, मैं रहूंगा … दिन मे जब तू बिना कुछ खाये –पीये काम करेंगी , तो … Read More

मैंने आज फिर कलम उठाई है

  कोरे कागज़ पर अल्फाजो की बहार आई है, अहसासो ने फिर दिल मे एक धुन बजाई है, बहुत दिन हुये …. मैंने आज फिर कलम उठाई है नये दौर मे एक नयी आवाज़ आई है, बीते वक्त की तस्वीर फिर आखो मे समाई है, बहुत दिन हुये …. मैंने आज फिर कलम उठाई है … Read More

बूंद

खुशी हो या हो गम के दिन, साथ हमेशा रहती है…. बूंद,   ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली, साथ हमेशा रहती है … बूंद  हर पल को देखकर , अपने अस्तित्व को बताने …बाहर आ जाती है …बूंद  . खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी , हर बार साथ निभाती है ….बूंद .  … Read More